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हाईकोर्ट ने पूछा: पुलिस हिरासत में मौत में न्यायिक जांच रिपोर्ट पर क्या की गई कार्रवाई, अपर मुख्य गृह सचिव बताएं

Sat, 26 Mar 2022 01:56 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 26 Mar 2022 01:56 AM IST
सार

न्यायिक जांच में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने हिरासत में मौत के लिए पुलिस अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है। कहा है कि पुलिस ने मृतक का पोस्टमार्टम नहीं कराया और लाश घर वालों को बिना सौंपे अंतिम संस्कार कर दिया।

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High Court: What is the action taken on the judicial inquiry report in the death in police custody, tell the Additional Chief Home Secretary
Prayagraj News : इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : प्रयागराज

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुलंदशहर के खुर्जा नगर कोतवाली पुलिस हिरासत में मौत पर सख्त रुख अपनाते हुए अपर मुख्य गृह सचिव से कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। इस रिपोर्ट को उन्हें व्यक्तिगत हलफनामें पर 19 अप्रैल तक दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने पूछा है कि हिरासत में मौत के लिए जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों पर क्या कार्रवाई की गई है?

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न्यायिक जांच में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने हिरासत में मौत के लिए पुलिस अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है। कहा है कि पुलिस ने मृतक का पोस्टमार्टम नहीं कराया और लाश घर वालों को बिना सौंपे अंतिम संस्कार कर दिया। याची सुरेश देवी व अन्य की ओर से दाखिल याचिका की सुनवाई न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र और न्यायमूर्ति रजनीश कुमार की खंडपीठ कर रही है।

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पुलिस की खुदकुशी की कहानी साबित हुई गलत
कोर्ट ने पुलिस हिरासत में हुई मौत को गंभीर बताया। कहा कि न्यायिक जांच में पुलिस की खुदकुशी की कहानी गलत साबित हुई है। ऐसे में जिम्मेदार अफसरों पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही पीड़ित पक्ष को मुआवजा देने पर विचार करना चाहिए। कोर्ट ने आदेश की प्रति प्रदेश के मुख्य सचिव को भेजने का भी निर्देश दिया है और याची को जांच रिपोर्ट देने को कहा है। याचिका की सुनवाई 19 अप्रैल को होगी।


याचिका में कहा गया है कि याची के बेटे सोमदत्त उर्फ  सोनू को पुलिस पकड़ कर थाने ले गई। उसने आपसी सहमति से अंतरजातीय विवाह किया था। 11/12 दिसंबर 2020 की रात पुलिस ने सोनू की जमकर पिटाई की। जिससे उसकी थाने में ही मौत हो गई।

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दोषी पुलिस अधिकारियों पर दर्ज हो एफआईआर


याची ने पुलिस पर हिरासत में हत्या करने का आरोप लगाया। पुलिस इसे खुदकुशी बता रही है। मामले की न्यायिक जांच की गई। जिसमें हिरासत में मौत के आरोप की पुष्टि की गई। साथ ही मौत के लिए पुलिस को जवाबदेह ठहराया गया है। अपर शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि जांच रिपोर्ट 18 जनवरी 2022 को अपर मुख्य सचिव गृह को जिलाधिकारी द्वारा भेजी जा चुकी है। उसके बाद क्या हुआ इसकी जानकारी नहीं है।



कोर्ट ने कहा कि न्यायिक जांच में साफ  कहा है कि मौत के लिए पुलिस जिम्मेदार है। ऐसे में पुलिस विभाग के बड़े अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। पुलिस ने बिना पोस्टमार्टम कराए अंतिम संस्कार कर दिया। दोषी पुलिस अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज कराई जाए और पीड़िता को मुआवजा देने पर विचार किया जाए।
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