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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court: Welfare of minor children takes precedence over parental rights; custody of both minor children

हाईकोर्ट : नाबालिग बच्चों का हित माता-पिता के अधिकारों से ऊपर, पिता को सौंपी दोनों नाबालिग बच्चों की अभिरक्षा

Sun, 04 Oct 2026 02:00 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 04 Oct 2026 02:00 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि नाबालिगों की अभिरक्षा का फैसला केवल माता-पिता के कानूनी अधिकारों के आधार पर नहीं किया जा सकता। इसमें बच्चों का कल्याण सर्वोपरि होना चाहिए।

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High Court: Welfare of minor children takes precedence over parental rights; custody of both minor children
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि नाबालिगों की अभिरक्षा का फैसला केवल माता-पिता के कानूनी अधिकारों के आधार पर नहीं किया जा सकता। इसमें बच्चों का कल्याण सर्वोपरि होना चाहिए। माता-पिता का अधिकार प्रासंगिक है, लेकिन वह बच्चों के कल्याण के अधीन है। यह आदेश न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकल पीठ ने मुरादाबाद निवासी की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर दिया।

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याची ने दो नाबालिग बच्चों की अभिरक्षा के लिए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। दोनों बच्चे मां और नाना के साथ रह रहे थे। याची ने दलील दी कि वह औद्योगिक इकाई चलाता है। उसके पास एक बड़ा घर है। वह बच्चों की बेहतर परवरिश करने में सक्षम है। याची ने अपनी आय के समर्थन में कोर्ट में साक्ष्य भी प्रस्तुत किए। वहीं, याची की पत्नी ने अपनी कमाई का दावा किया पर कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी।
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कोर्ट ने कहा-अभिरक्षा के वक्त इन बिंदुओं पर ध्यान दें

कोर्ट ने कहा कि अभिरक्षा का फैसला देते समय बच्चे की शारीरिक, भावनात्मक, शैक्षणिक, विकासात्मक जरूरतों के साथ उसके लिए उपलब्ध वातावरण की स्थिरता, सुरक्षा और देखभाल की क्षमता का भी आकलन किया जाना चाहिए।

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पिता ने उचित शिक्षा, सुरक्षित वातावरण का भी दिया था आश्वासन

कोर्ट ने कहा कि बच्चों का लंबे समय से मां और नाना के साथ रहना उनके भावनात्मक जुड़ाव का आधार है। कोर्ट के समक्ष बच्चों का मां और नाना की गोद से हटने में झिझकना पिता को अस्वीकार करना नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री के आधार पर पाया कि पिता के पास बच्चों की शिक्षा, पालन-पोषण,विकास के लिए पर्याप्त आर्थिक साधन और आवासीय व्यवस्था है। पिता ने बच्चों को उचित शिक्षा और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया था। ऐसे में कोर्ट ने दोनों बच्चों की अभिरक्षा पिता को सौंप दी।

मां वीडियो कॉल व रविवार को मिल सकेगी

कोर्ट ने मां के अधिकारों को सुरक्षित रखते हुए उसे प्रत्येक रविवार दोपहर दो से शाम छह बजे तक बच्चों से मिलने और प्रतिदिन शाम छह से रात नौ बजे तक वीडियो कॉल के जरिये बातचीत का अधिकार दिया है।

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