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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court expresses concern: Says judges have no platform left to voice their views other than judicial order

हाईकोर्ट ने जताई चिंता : कहा- अपनी बात रखने के लिए जजों के पास न्यायिक आदेशों के अलावा कोई मंच नहीं बचा

Sat, 03 Oct 2026 07:25 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 03 Oct 2026 07:25 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपनी आंतरिक प्रशासनिक व्यवस्था और न्यायाधीशों के बीच संस्थागत संवाद को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने 80 पन्नों के फैसले में कहा कि पिछले 10 वर्षों में केवल 16 फुल कोर्ट बैठकें हुईं, जबकि नियमों के तहत इन्हें नियमित रूप से आयोजित किया जाना चाहिए।

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विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने न्यायपालिका की आंतरिक कार्यप्रणाली, प्रशासनिक व्यवस्था और न्यायाधीशों के बीच संवाद की कमी पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अधीनस्थ अदालतों में मुकदमों के वर्षों से लंबित रहने और कार्यप्रणाली की समीक्षा से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने तल्ख टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय के भीतर संस्थागत संवाद का कोई प्रभावी माध्यम नहीं बचा है। ऐसी परिस्थितियां बन गई हैं कि न्यायाधीशों को अपनी चिंताओं, सुझावों या प्रशासनिक समस्याओं को उठाने के लिए न्यायिक आदेशों के अलावा कोई अन्य मंच ही उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।

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हाईकोर्ट ने अपने 80 पन्नों के विस्तृत फैसले (पप्पू बनाम यूपी राज्य केस) में स्पष्ट किया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट रूल्स, 1952 के तहत मुख्य न्यायाधीश के लिए हर तीन महीने में कम से कम एक बार फुल कोर्ट की बैठक बुलाना अनिवार्य है। इसके विपरीत पिछले 10 वर्षों में केवल 16 फुल कोर्ट बैठकें ही बुलाई गईं।
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अदालत ने निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्य न्यायाधीश की ओर से गठित विभिन्न प्रशासनिक समितियों के निर्णयों या मिनट्स को भी फुल कोर्ट के साथ साझा नहीं किया जाता। इससे ऐसा प्रतीत होता है जैसे ये समितियां हाईकोर्ट के मुख्य प्रशासनिक निकाय से अलग और स्वतंत्र होकर काम कर रही हों। पीठ ने यह भी कहा कि फुल कोर्ट बैठकों में किसी मुद्दे पर व्यक्तिगत न्यायाधीशों की असहमति या मत को दर्ज न करना भी पारदर्शी विचार-विमर्श की भावना के खिलाफ है।
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इन सभी प्रशासनिक विसंगतियों को रेखांकित करते हुए न्यायमूर्ति ने अपने फैसले के जरिये मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया है कि वे नियमों के तहत नियमित रूप से फुल कोर्ट की बैठकें आयोजित करने पर विचार करें ताकि न्यायाधीशों के बीच संस्थागत संवाद बहाल हो सके और न्याय प्रणाली में जरूरी प्रशासनिक सुधार लागू किए जा सकें।

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