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युवा अधिवक्ता की वीडियो कांफ्रेंसिंग से मुकदमे की सुनवाई की मांग नामंजूर
Tue, 23 Jun 2020 07:39 PM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Tue, 23 Jun 2020 07:39 PM IST
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने युवा अधिवक्ता को वीडियो कांफ्रेंसिंग से उपस्थित होकर मुकदमे में बहस करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। सरिता यादव की क्रिमिनल रिट पर सुनवाई के दौरान जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस समित गोपाल की बेंच के सामने मामला आया। याचिका पर बहस करने के लिए कोई वकील उपस्थित नहीं हुआ।
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ऑफिस द्वारा पीठ को बताया गया कि अधिवक्ता स्वाती अग्रवाल ने ई मेल से अर्जी दाखिल कर इस मुकदमे में वीडियो कांफ्रेंसिंग से उपस्थित होकर बहस करने की अनुमति मांगी है। इस पर पीठ का कहना था कि अर्जी देखने से यह पता नहीं चलता है कि अधिवक्ता हाईकोर्ट द्वारा वेब लिंक के जरिए वकीलों के बहस हेतु जारी एडवाइजरी के अनुसार योग्यता रखतीं हैं या नहीं।
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कोर्ट ने अर्जी खारिज करते हुए याचिका की नियमित सुनवाई के लिए 14 जुलाई की तिथि नियत की है। उल्लेखनीय है कि आठ जून से हाईकोर्ट ने वकीलों की मांग पर खुली अदालत में सुनवाई की व्यवस्था लागू कर दी है। इसके साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए भी मुकदमों की सुनवाई की जा रही है। इसमें कई प्रकार की शर्तें हैं।
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खुली सुनवाई के दौरान 65 से अधिक आयु के अधिवक्ताओं को अदालत आने की मनाही है। आवश्यकता होने पर वह वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अपना पक्ष रख सकते हैं। इसके लिए उनको वेब लिंक मुहैया कराया जाता है। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के लिए एक बार छह से अधिक वकीलों के अदालत में उपस्थित होने की भी मनाही है। उन्हीं वकीलों को प्रवेश दिया जा रहा है, जिनका केस सुनवाई में लगा है।