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UP : हाईकोर्ट ने हत्या मामले में आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी, एडीजे कोर्ट ने सुनाई थी सजा
Wed, 10 Sep 2025 06:32 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 10 Sep 2025 06:32 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विपुल और नरेश की आपराधिक अपीलों पर आंशिक फैसला सुनाते हुए उनकी हत्या के लिए दोषसिद्धि और आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है। साथ ही उन्हें शस्त्र अधिनियम के तहत लगे आरोपों से बरी कर दिया गया है।
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लोक अदालत।
- फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विपुल और नरेश की आपराधिक अपीलों पर आंशिक फैसला सुनाते हुए उनकी हत्या के लिए दोषसिद्धि और आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है। साथ ही उन्हें शस्त्र अधिनियम के तहत लगे आरोपों से बरी कर दिया गया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ व न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा की खंडपीठ ने दिया है।
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मुजफ्फरनगर में 2007 राज कुमार को उनके स्कूल के कार्यालय में गोली मार दी गई थी। इस मामले में अपीलकर्ताओं के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया गया था। 2014 में अपर सत्र न्यायाधीश ने दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसे हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए अपील दाखिल की गई।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपी विपुल और नरेश ने जातीय वैमनस्यता के चलते राजकुमार की गोली मारकर हत्या की थी। बचाव पक्ष ने इसका विरोध किया। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत हत्या का मकसद सही था और चश्मदीद गवाहों की गवाही दोषसिद्धि को बरकरार रखने के लिए पर्याप्त थी। कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा लेकिन शस्त्र अधिनियम के तहत दोषसिद्धि और सजा को रद्द कर दिया। अपील आंशिक रूप से स्वीकार हुई।
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