High Court : कानून पर हावी होने की बढ़ती प्रवृत्ति को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता, यह है पूरा मामला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद में एक संपत्ति पर दोबारा अवैध कब्जे के मामले में नाराजगी जताते हुए सख्त टिप्पणी की है। कहा है कि कानून की अवहेलना और कानून पर हावी होने की प्रवृत्ति को बर्दाश्त नहीं किया जा सकती।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद में एक संपत्ति पर दोबारा अवैध कब्जे के मामले में नाराजगी जताते हुए सख्त टिप्पणी की है। कहा है कि कानून की अवहेलना और कानून पर हावी होने की प्रवृत्ति को बर्दाश्त नहीं किया जा सकती। इस तरह की कार्रवाइयों को रोका नहीं गया तो इससे कानून के शासन को गहरा नुकसान होगा।
कोर्ट ने कहा कि एडीएम या डीएम को सरफेसी एक्ट के तहत दोबारा आवेदन स्वीकार करने की पूरी शक्ति है। यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर बी सराफ और न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि की खंडपीठ ने डीसीबी बैंक लिमिटेड की ओर से दायर याचिका पर दिया। बैंक ने याचिका में मांग की थी कि सरफेसी अधिनियम, 2002 के तहत जब्त संपत्ति पर दोबारा हुए अवैध कब्जे को हटाया जाए और बैंक को पुनः अधिकार दिया जाए।
यह था मामला
डीसीबी (डेवलपमेंट क्रेडिट बैंक) ने एक संपत्ति को बंधक बनाकर करीब 18 लाख रुपये ऋण स्वीकृत किया था। कर्जदार ने जब ऋण नहीं चुकाया तो बैंक ने सरफेसी एक्ट के तहत संपत्ति पर कब्जे के लिए आवेदन किया, जिसे स्वीकार कर लिया गया। नीलामी की कार्यवाही की गई और बोलीदाता के पक्ष में बिक्री प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। इस बीच कर्जदार ने कथित रूप से संपत्ति पर कब्जा कर लिया। याची बैंक ने दुबारा सरफेसी एक्ट के तहत कब्जे के लिए आवेदन किया, जिसे इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि एक बार कब्जे का आदेश दिया जा चुका है तो नए आवेदन पर विचार नहीं किया जा सकता। याची बैंक ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।