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अब ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले शादी घरों पर हाईकोर्ट सख्त, 100 मीटर ज्यादा दूरी से न निकले बारात

Thu, 26 Sep 2019 09:32 PM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 26 Sep 2019 09:32 PM IST
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High court strict on wedding houses causing noise pollution
High court strict on wedding houses causing noise pollution
प्रयागराज। अदालत के सख्त निर्देश के बावजूद ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले विवाह घरों पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने नियमों का उल्लंघन करने वाले शादी घरों पर भारी जुर्माना लगाने और लाइसेंस निरस्त करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण नियमों के तहत डीजे बजाने की अनुमति न दी जाए तथा तय मात्रा से अधिक डेसिबल की ध्वनि होने पर कार्रवाई की जाए।
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कोर्ट ने कहा है कि किसी विवाह गृह में अधिक ध्वनि होने की शिकायत यदि पुलिस के 100 नंबर पर आती है तो पुलिस निर्देशों का पालन करे। कोर्ट ने प्रयागराज विकास प्राधिकरण के सचिव से छह नवंबर तक प्रगति रिपोर्ट मांगी है। शिव वाटिका बारात घर और अन्य की याचिकाओं पर यह आदेश न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल तथा न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की खंडपीठ ने दिया है।

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कोर्ट ने कहा है कि सुशील चन्द्र श्रीवास्तव केस में दिए गए निर्देशों के तहत यदि कोई विवाह गृह ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण कानून का पालन नहीं करता तो पहली गलती पर एक लाख, दूसरी गलती पर पांच लाख और तीसरी गलती पर 10 लाख रुपये जुर्माना वसूला जाए। तीन गलती के बाद जिलाधिकारी उस विवाह गृह का लाइसेंस निरस्त कर दे।

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सौ मीटर से ज्यादा दूरी से न निकले बारात
कोर्ट ने कहा है कि कोई भी बारात विवाह घर से अधिकतम 100 मीटर की दूरी पर एकत्र होकर निकाली जाए। इसका पालन न करने पर विवाह घर के मालिक से जुर्माना लिया जाए। हर विवाह घर से नियमों के पालन का हलफनामा लिया जाए। कोर्ट ने पीडीए के प्रस्तावित बाइलॉज को लागू बाइलॉज के विपरीत होने के कारण अनुमोदित करने से इंकार कर दिया है। और कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार बाइलॉज तैयार किया जाए।


1500 वर्गगज में हो विवाह घर
कोर्ट ने कहा है कि कानून के खिलाफ प्रयागराज शहर में तमाम विवाह गृह चल रहे हैं। जो शहर वासियों के लिए परेशानियों का सबब बने हुए हैं। कोर्ट ने कहा पीडीए ने भी माना कि विवाह गृह शहर की यातायात व्यवस्था के लिए परेशानी खड़ी कर रहे हैं। प्राधिकरण ने दो बाइलॉज पेश किया। कोर्ट ने कहा है कि मैरेज हॉल 1500 वर्ग गज में होने चाहिए। 18 मीटर चौड़ी सड़क पर 18 मीटर का फ्रंटेज होना चाहिए। 30 फीसदी कवर एरिया और 40 फीसदी ओपन एरिया होना चाहिए। साथ ही वाहन पार्किंग की व्यवस्था हो। कोर्ट ने शहर के मास्टर प्लान और जोनल प्लान पर भी विचार किया और कहा कि केवल सिविल लाइंस में ही जोनल प्लान तैयार हुआ है। 19 साल में पूरे शहर का जोनल प्लान तैयार नहीं किया जा सका। याचिका की सुनवाई छह नवंबर को होगी।

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