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High Court : नाबालिग बेटी के बयान तलाक के लिए पर्याप्त साक्ष्य, ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द
Fri, 26 Jul 2024 03:17 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 26 Jul 2024 03:17 PM IST
सार
बरेली निवासी मंजूषा ने 1999 में शादी की थी। इस दौरान उन्हें दो बच्चे हुए। दोनों पक्ष 2011 तक साथ-साथ रहते थे। इस दौरान उनके बीच गंभीर मतभेद पैदा हो गए। मंजूषा ने पति पर क्रूरता का आरोप लगाते हुए परिवार न्यायालय बरेली में तलाक के लिए याचिका दाखिल की।
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अदालत का फैसला।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि मां की ओर से पति पर लगाए गए क्रूरता के आरोपों को साबित करने के लिए नाबालिग बेटी के बयान तलाक के लिए पर्याप्त आधार हैं। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द कर तलाक मंजूर कर लिया। न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति डी रमेश की पीठ ने यह आदेश मंजूषा की अपील पर दिया।
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बरेली निवासी मंजूषा ने 1999 में शादी की थी। इस दौरान उन्हें दो बच्चे हुए। दोनों पक्ष 2011 तक साथ-साथ रहते थे। इस दौरान उनके बीच गंभीर मतभेद पैदा हो गए। मंजूषा ने पति पर क्रूरता का आरोप लगाते हुए परिवार न्यायालय बरेली में तलाक के लिए याचिका दाखिल की। ट्रायल कोर्ट ने तलाक की याचिका को इस आधार पर खारिज कर दिया कि क्रूरता के आरोप अस्पष्ट थे। इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।
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हाईकोर्ट ने दलीलों को सुनने व तथ्यों का अवलोकन करने के बाद कहा कि क्रूरता को साबित करने के लिए नाबालिग बेटी का बयान पर्याप्त साक्ष्य था, क्योंकि इसे कभी चुनौती नहीं दी गई। कोर्ट ने कहा कि जब पक्षों की नाबालिग बच्ची ने विशेष रूप से यह बयान दिया कि उसके पिता ने कई मौकों पर मां का गला घोंटने की कोशिश की। नाबालिग के इस बयान के आगे क्रूरता का कोई अन्य सबूत पेश करने की जरूरत नहीं है। उच्च न्यायालय ने 11 साल से अलग रह रहे पक्षों को तलाक दे दिया।
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