High Court : टीजीटी विज्ञान की योग्यता मामले में राज्य सरकार ने जवाब दाखिल करने के लिए मांगा समय
इलाहाबाद हाईकोर्ट में प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) विज्ञान पद की योग्यता को चुनौती देने वाली याचिका पर राज्य सरकार ने जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा है।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट में प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) विज्ञान पद की योग्यता को चुनौती देने वाली याचिका पर राज्य सरकार ने जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा है। अब मामले की सुनवाई 22 सितंबर होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति चंद्रधारी सिंह ने दिया है। प्रयागराज के हेमंत कुमार, राज बहादुर सिंह, विवेक कुमार,अब्दुल कादिर अंसारी ने टीजीटी विज्ञान विषय के लिए केवल भौतिकी और रसायन को अनिवार्य विषय मानने वाले सर्कुलर के विरोध में याचिका दाखिल की है।
उनका कहना है कि 22 अप्रैल 2024 के सर्कुलर में निर्धारित योग्यता को असंवैधानिक घोषित किया जाए। टीजीटी विज्ञान पद की योग्यता में जीव विज्ञान (वनस्पति विज्ञान और प्राणी विज्ञान) को भी शामिल करने का निर्देश दिया जाए। याची प्राणी विज्ञान वनस्पति विज्ञान और रसायन विज्ञान विषय में स्नातक हैं। ऐसे में उन्हें टीजीटी विज्ञान पद के लिए आवेदन करने की अनुमति दी जाए। राज्य सरकार के वकील याचिका का विरोध करते हुए जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा है।
हाईकोर्ट ने याची और अन्य की गिरफ्तारी पर लगाई रोक
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याची शैलेंद्र कुमार और अन्य की गिरफ्तारी पर अगले आदेश तक रोक लगाने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव गुप्ता और न्यायमूर्ति राजीव लोचन शुक्ला की पीठ ने दिया है।
ललितपुर के कोतवाली थाना क्षेत्र में याचियों पर 24 अगस्त 2025 को गंभीर चोट पहुंचाने सहित अन्य आरोप में एफआईआर दर्ज की गई थी। याची ने इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर गिरफ्तारी पर रोक लगाने और मुकदमे को रद्द करने की मांग की थी। याची के वकील ने दलील दी कि पहले से चल रहे एक दीवानी विवाद के चलते यह एफआईआर उन्हें परेशान करने के इरादे से दर्ज कराई गई है। कोर्ट ने मामले को विचारणीय मानते हुए सुनवाई के लिए अगली तिथि 12 नवंबर 2025 लगाते हुए अगले आदेश तक गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। प्रतिवादियों से जवाब मांगा है।
इलाज में खर्च 62195 रुपये बीमित को दे कंपनी: उपभोक्ता आयोग
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमा कंपनी को बीमित के इलाज में खर्च 62195 रुपये आठ प्रतिशत ब्याज सहित देने का आदेश दिया है। साथ ही मानसिक-आर्थिक क्षतिपूर्ति के रूप में 15 हजार और वाद व्यय के रूप में पांच हजार रुपये आदेश की तिथि से दो महीने के भीतर देने की बात कही है। यह आदेश आयोग के अध्यक्ष मोहम्मद इब्राहीम और सदस्य प्रकाश चंद्र त्रिपाठी की पीठ ने दिया।
झूंसी थाना क्षेत्र के चक भटाई नई कॉलोनी निवासी राजकुमार ने 21 मार्च 2020 को स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से पूरे परिवार का स्वास्थ्य बीमा कराया था। बीमा 19 अप्रैल 2023 तक वैध था। 28 अप्रैल 2022 को उनकी बेटी आशी को आरोग्यम केयर हॉस्पिटल में भर्ती कराया और पांच मई 2022 तक इलाज चला। इलाज में कुल 62,195 रुपये खर्च हुए थे।
बेटी के इलाज में खर्च के लिए बीमा कंपनी के समक्ष दावा किया। इसके बाद भी बीमा कंपनी ने रुपयों का भुगतान करने से इन्कार कर दिया। इसे परिवादी ने उपभोक्ता आयोग में चुनौती दी। आयोग ने सारे दस्तावेज उपलब्ध कराने के बाद भी रुपयों का भुगतान न किए जाने को सेवा में कमी माना। इन तथ्यों के आधार पर आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश दिया कि वह परिवादी को इलाज में खर्च रुपयों को ब्याज सहित भुगतान करे।