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High Court : सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट को लाइक नहीं, शेयर करना अपराध है

Mon, 21 Apr 2025 12:15 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 21 Apr 2025 12:15 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि सोशल मीडिया पोस्ट को लाइक करना उसे प्रसारित या प्रकाशित करने के बराबर नहीं है, और यह सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 के अंतर्गत नहीं आएगा, जो अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री से संबंधित है। न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव ने आगरा के इमरान खान के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को रद्द करते हुए यह टिप्पणी की।

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High Court: Sharing inflammatory posts on social media is a crime, not liking it
अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट को लाइक करना नहीं, शेयर करना अपराध है। पोस्ट को साझा व पसंद करने में दो अलग-अलग बातें हैं। किसी पोस्ट या संदेश को तब ही प्रकाशित कहा जा सकता है, जब उसे शेयर या फारवर्ड किया जाए। वैसे भी आईटी एक्ट के तहत केवल अश्लील तस्वीर या वीडियो का प्रसारण ही अपराध के दायरे में आता है। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव की अदालत ने आगरा निवासी इमरान खान के खिलाफ शुरू आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी।

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मामला मंटोला थाना क्षेत्र का है। इमरान पर आरोप है कि उसने चौधरी फरहान उस्मान नाम की आईडी से फेसबुक पर प्रसारित एक पोस्ट को लाइक किया था। उसमें विरोध-प्रर्दशन व राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपने के लिए आगरा कलक्ट्रेट पर लोगों को बुलाया गया था। पुलिस के मुताबिक यह पोस्ट भड़काऊ थी। इसे देख एक समुदाय विशेष के करीब 600-700 लोगों ने बिना इजाजत जुलूस निकाला। इससे शांति व्यवस्था भंग हुई।

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पुलिस ने इमरान के खिलाफ आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर आरोप पत्र ट्रायल कोर्ट में दाखिल किया था। कोर्ट ने मामले का संज्ञान लेकर इमरान को बतौर आरोपी तलब किया था। इसके खिलाफ आरोपी युवक ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। आरोपी के वकील ने दलील में बताया कि युवक ने फेसबुक अकाउंट पर ऐसा कोई आपत्तिजनक पोस्ट प्रसारित नहीं किया है, जो आईटी एक्ट के तहत अपराध हो। वहीं, पुलिस का कहना था कि इमरान ने अपने फेसबुक से भड़काऊ पोस्ट डिलीट कर दिया है। लेकिन, व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐसी ही सामग्री पाई गई है। कोर्ट ने पुलिस की केस डायरी में पाया कि इमरान ने उस्मान के पोस्ट को केवल लाइक किया है। लिहाजा, कोर्ट ने इमरान के खिलाफ ट्रायल कोर्ट में शुरू आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी।

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हाईकोर्ट की टिप्पणी

भड़काऊ पोस्ट पर आईटी एक्ट की धारा 67 लागू नहीं की जा सकती और न ही इसके लिए किसी सजा का प्रावधान है। इस धारा के दायरे में ऐसी उत्तेजक सामग्री आती है, जिससे अश्लीलता झलके। 



 

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