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High Court : हाईकोर्ट ने सहायता प्राप्त संस्थानों के सेवानिवृत्त शिक्षकों की ग्रेच्युटी पर मांगा जवाब

Wed, 22 Jul 2026 04:36 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 22 Jul 2026 04:36 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों के सेवानिवृत्त शिक्षकों को ग्रेच्युटी देने के मामले में प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। साथ ही याचियों को प्रत्युत्तर हलफनामा दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है।

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High Court seeks response regarding gratuity of retired teachers from aided institutions.
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों के सेवानिवृत्त शिक्षकों को ग्रेच्युटी देने के मामले में प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। साथ ही याचियों को प्रत्युत्तर हलफनामा दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकल पीठ ने सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य और तीन अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर दिया। गोरखपुर निवासी याची जय नारायण शुक्ला वर्ष 2007, चंद्र भाई त्रिपाठी वर्ष 1989 और सुरेश कुमार पांडेय वर्ष 2017 में प्रधानाचार्य पद से सेवानिवृत्त हुए।

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इनका कहना है कि ये सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों के सेवानिवृत्त शिक्षक हैं और भुगतान ग्रेच्युटी अधिनियम-1972 के तहत ग्रेच्युटी के हकदार हैं। ग्रेच्युटी की मांग में इन्होंने प्रदेश सरकार के समक्ष प्रत्यावेदन दाखिल किया था। सुनवाई न होने पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
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याची के अधिवक्ता ने अपनी दलील में इलाहाबाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के नौ अप्रैल 2026 के फैसले का हवाला दिया। कहा कि सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों के शिक्षक भुगतान ग्रेच्युटी अधिनियम-1972 के प्रावधानों के अंतर्गत आते हैं। ऐसे में इनको ग्रेच्युटी का अधिकार है।
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राज्य सरकार की ओर से याचिका में देरी का मुद्दा उठाते हुए कहा गया कि दावा काफी देर से किया गया है। साथ ही देरी का कोई उचित स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। कोर्ट ने मामले को विचारणीय मानते हुए प्रतिवादियों को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया। 

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