फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court said: Police cannot file FIR in case of criminal defamation.

हाईकोर्ट ने कहा : आपराधिक मानहानि के मामले में पुलिस दर्ज नहीं कर सकती एफआईआर

Sat, 16 Mar 2024 05:04 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 16 Mar 2024 05:04 PM IST
सार

वादिनी सुम्बरीन जमाल की ओर से उसके ही पूर्व वकील द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर को चुनौती देते हुए अधिवक्ता रजत ऐरन एवम राज कुमार सिंह द्वारा जस्टिस एमसी त्रिपाठी एवम जस्टिस गजेन्द्र कुमार की पीठ के समक्ष बहस की गई कि वादिनी हाई कोर्ट परिसर में अपने अधिवक्ता से मुकदमे की फाइल लेकर नए अधिवक्ता करने आयी थी।

विज्ञापन
High Court said: Police cannot file FIR in case of criminal defamation.
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

मुवक्किल और अधिवक्ता के मध्य मुकदमे की फाइल को लेकर उपजे विवाद में वकील की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर की वैधानिकता की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दंड प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों को दर्ज करते हुए माना कि आपराधिक मानहानि की एफआईआर दर्ज करने की किसी प्रकार की कोई शक्ति पुलिस में निहित नहीं है। 

विज्ञापन


वादिनी सुम्बरीन जमाल की ओर से उसके ही पूर्व वकील द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर को चुनौती देते हुए अधिवक्ता रजत ऐरन एवम राज कुमार सिंह द्वारा जस्टिस एमसी त्रिपाठी एवम जस्टिस गजेन्द्र कुमार की पीठ के समक्ष बहस की गई कि वादिनी हाई कोर्ट परिसर में अपने अधिवक्ता से मुकदमे की फाइल लेकर नए अधिवक्ता करने आयी थी। फाइल वापस देने को लेकर दोनो पक्षों में विवाद हुआ एवम जिसके पश्चात जहा याची द्वारा पुलिस को  शिकायत दी गई वहीं उक्त अधिवक्ता द्वारा याची के विरुद्ध अपराधिक मानहानि का मुकदमा प्रयागराज के थाना कैंट में दर्ज करवाया गया। 
विज्ञापन


 याची की ओर से दलील दी गई कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 199 के प्राविधानुसार आईपीसी की धारा 500 (अपराधिक मानहानि) का मुकदमा दर्ज करने की शक्ति पुलिस के पास नही है। दोनो ही पक्ष समाज में प्रबुद्ध एवम  प्रतिष्ठित घरो से संबंध रखते है एवम जिस कारण विवाद को मध्यस्थता से भी समाप्त किया जा सकता है। उक्त कानूनी दलीलो को दर्ज करते हुए हाईकोर्ट द्वारा याची की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए दोनो पक्षों को मध्यस्थता एवम सुलह कर कोर्ट के सामने पेश होने का आदेश दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed