हाईकोर्ट ने कहा : अदालती आदेशों संग शतरंजी खेल...खेल रहे डीआईओएस बलिया, बिना इजाजत नया आदेश पारित करने पर रोक
मामला बलिया जिले के रानीपुर स्थित श्री सुदीत बाबा इंटर कॉलेज में कार्यवाहक प्रधानाचार्य की नियुक्ति से जुड़े विवाद का है। याची कॉलेज के वरिष्ठ प्रवक्ता है। 11 अगस्त 2016 को उन्हें प्रबंधन ने कार्यवाहक प्रधानाचार्य नियुक्त किया था।
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कार्यवाहक प्रधानाचार्य की नियुक्ति से जुड़े एक विवाद में जिला विद्यालय निरीक्षक बलिया (डीआईओएस) के आचरण पर तल्ख टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि वह कुंठाग्रस्त हैं। इस कारण वह हाईकोर्ट के आदेशों के साथ शतरंज खेल रहे हैं। यह तल्ख टिप्पणी न्यायमूर्ति जेजे मुनीर ने बलिया जिले के श्री सुदीतबाबा इंटर कॉलेज के कार्यवाहक प्रधानाचार्य अशोक कुमार पांडेय की ओर से डीआईओएस द्वारा याची को पद से हटा कर अयोग्य सहायक अध्यापक की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए की।
कया है मामला
मामला बलिया जिले के रानीपुर स्थित श्री सुदीत बाबा इंटर कॉलेज में कार्यवाहक प्रधानाचार्य की नियुक्ति से जुड़े विवाद का है। याची कॉलेज के वरिष्ठ प्रवक्ता है। 11 अगस्त 2016 को उन्हें प्रबंधन ने कार्यवाहक प्रधानाचार्य नियुक्त किया था। अपनी नियुक्ति से 4 जुलाई 2022 तक वह शांतिपूर्वक अपने कर्तव्य का पालन करते रहे। इसी बीच रमेश कुमार सिंह ने जिला विद्यालय निरीक्षक बलिया का कार्यभार संभाला। इसके बाद याची पर कई आरोप लगाते हुए उन्हें निलंबित कर दिया गया और उनसे कनिष्ठ और एलटी ग्रेड सहायक अध्यापक को कार्यवाहक प्रधानाचार्य नियुक्त कर दिया।
याची की दलील
याची के अधिवक्ता का कहना था कि याची ने निलंबन आदेश को हाईकोर्ट ने चुनौती दी थी, जिसपर हाईकोर्ट ने निलंबन आदेश पर रोक लगाते हुए डीआईओएस से जवाब तलब किया था। लेकिन डीआईओएस ने जवाब देने के बजाय याची के खिलाफ नए आरोप लागते हुए डीएम बलिया से शिकायत की और फिर गबन के आरोप में नई जांच शुरू हो गई। इस नई जांच का हवाला देते हुए निलंबन आदेश पर पारित स्थगन आदेश का पालन नहीं किया।
यही नहीं, उन्होंने याची को जीवन निर्वाह भत्ता के रूप में कार्यवाहक प्रधानाचार्य का भत्ता न देकर प्रवक्ता को मिलने वाला भत्ता प्रदान करने का आदेश पारित कर दिया। याची ने उसे भी चुनौती दी। कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए, पूर्व में पारित आदेश के अनुपालन में याची को वेतन सहित बहाल करने का आदेश पारित किया, लेकिन डीआईओएस ने नही माना, जबकि याची ने अवमानना याचिका भी दाखिल की और उस पर उन्हें नोटिस जारी हुई है।
इसकी जानकारी पर याची के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई, उस पर भी हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। याची का आरोप है कि डीआईओएस दुर्भावनापूर्ण तरीके से याची को हटा कर सहायक अध्यापक आलोक कुमार सिंह की जबरन नियुक्ति करना चाहते है। जबकि वह इस पद के लिए योग्य नहीं है।