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High Court : बीएचयू के कुलपति को हाईकोर्ट का अवमानना नोटिस, यूरोलॉजी के विभागाध्यक्ष पद पर नियुक्ति का मामला
Thu, 21 Mar 2024 06:14 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 21 Mar 2024 06:14 AM IST
सार
मामला बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में सहायक आचार्य और सह आचार्यों के प्रोन्नति का है। बीएचयू के 66 चिकित्सा शिक्षकों ने डायनेमिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेस (डीएसीपी) योजना के तहत प्रोन्नत्ति प्रदान करने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट ने याचिका निस्तारित करते हुए कुलपति को निर्देश दिया था कि चिकित्सा शिक्षकों की प्रोन्नति का मामला तीन माह में निपटाया जाए।
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काशी हिंदू विश्वविद्यालय
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूरोलॉजी विभाग के सह आचार्य डॉ. ललित कुमार को विभागाध्यक्ष बनाने पर जल्द निर्णय न लेने पर बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुधीर जैन के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी किया है। यह आदेश न्यायमूर्ति दिनेश पाठक ने डॉ. ललित कुमार की अवमानना याचिका पर पारित किया।
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मामला बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में सहायक आचार्य और सह आचार्यों के प्रोन्नति का है। बीएचयू के 66 चिकित्सा शिक्षकों ने डायनेमिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेस (डीएसीपी) योजना के तहत प्रोन्नत्ति प्रदान करने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट ने याचिका निस्तारित करते हुए कुलपति को निर्देश दिया था कि चिकित्सा शिक्षकों की प्रोन्नति का मामला तीन माह में निपटाया जाए।
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उन्हीं में से एक यूरोलॉजी विभाग के सह आचार्य डॉ. ललित कुमार के मामले अपवाद स्वरूप मानते हुए कोर्ट ने 30 दिन में निस्तारण का आदेश दिया था, क्योंकि यूरोलॉजी विभाग में विभागाध्यक्ष का पद रोटेशन के आधार पर मार्च महीने में रिक्त होने वाला है। इस पद पर चक्रानुक्रम में नियुक्ति की जानी है।
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डॉ. ललित कुमार के अधिवक्ता सिद्धार्थ नंदन का कहना था कि यूरोलॉजी विभाग में विभागाध्यक्ष का पद मार्च में रिक्त होना है। चक्रानुक्रम में इस पद पर नियुक्त होने के लिए डॉ. ललित योग्य उम्मीदवार हैं। इस पद पर नियुक्ति मार्च 2024 में प्रस्तावित है। यदि मार्च तक इनकी प्रोन्नति पर विचार नहीं किया गया तो अगले तीन वर्ष तक ये विभागाध्यक्ष नहीं बन सकेंगे।
कोर्ट ने मार्च तक मामले का निस्तारण करते हुए विभागाध्यक्ष के पद पर नियुक्ति देने का आदेश दिया, लेकिन कुलपति ने इस आदेश का अनुपालन नहीं किया। जिससे नाराज कोर्ट ने कुलपति प्रो. सुधीर जैन के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी किया। कोर्ट ने आदेश का अनुपालन करने के लिए दो माह की अतिरिक्त मोहलत दी है। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि रिट कोर्ट के आदेश का दो माह में अनुपालन नहीं करने पर कारण बताना होगा, जिसकी वजह से प्रोन्नति पर निर्णय नहीं लिया जा सका।