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High court: यूपी-एमपी में बस संचालन के लिए मालिकों को नहीं मिली राहत
Wed, 05 Jan 2022 12:42 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 05 Jan 2022 12:42 AM IST
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी-एमपी में बसों केसंचालन के लिए बस मालिकों को राहत देने से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट ने राज्य परिवहन अपीलीय न्यायाधिकरण उत्तर प्रदेश के फैसले को सही मानते हुए मामले को सुनवाई के लिए फिर राज्य परिवहन प्राधिकरण के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा है।
यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने मोहम्मद सलीम सहित एक साथ चार मामलों की सुनवाई करते हुए दिया है। ये चारों मामले एक ही प्रकृति के थे। चारों में याचियों ने राज्य परिवहन अपीलीय न्यायाधिकरण के फैसले को चुनौती दी थी।
मामला झांसी जिले के नौगांव का है। यूपी-एमपी को 21 नवंबर 2006 के आपसी समझौते के आधार पर रूट नंबर 86 (दतिया-छतरपुर वाया झांसी नौगांव) बसों का संचालन करना था। झांसी से पांच बसों का संचालन होना था। उसके लिए राज्य परिवहन प्राधिकरण ने मानदंड तय किए थे। मामले में तीन बस ऑपरेटर्स के वाहन मानदंडों पर खरे उतरे तो उन्हें संचालन की अनुमति दे दी गई।
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जबकि, तीन वाहन ऑपरेटर्स को 45 दिन का समय देते हुए मानदंडों के आधार पर वाहनों की व्यवस्था के निर्देश दिए थे। लेकिन इन तीनों वाहन आपरेटरों ने इस फैसले को लेकर राज्य परिवहन अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष चुनौती दी और जब वहां से राहत नहीं मिली तो हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।
विरोधी पक्ष के अधिवक्ता गिरीश कुमार मालवीय का कहना था कि मामला अपीलीय न्यायाधिकरण ने तय कर दिया था। इसलिए इसमें कुछ बचा नहीं है। जबकि याची पक्ष के अधिवक्ताओं के तर्कों को कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया और राज्य परिवहन अपीलीय न्यायाधिकरण के आदेश को सही मानते हुए याचिकाओं को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने अपीलीय न्यायाधिकरण के आदेश को चस्पा करने का भी निर्देश दिया।
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यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने मोहम्मद सलीम सहित एक साथ चार मामलों की सुनवाई करते हुए दिया है। ये चारों मामले एक ही प्रकृति के थे। चारों में याचियों ने राज्य परिवहन अपीलीय न्यायाधिकरण के फैसले को चुनौती दी थी।
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मामला झांसी जिले के नौगांव का है। यूपी-एमपी को 21 नवंबर 2006 के आपसी समझौते के आधार पर रूट नंबर 86 (दतिया-छतरपुर वाया झांसी नौगांव) बसों का संचालन करना था। झांसी से पांच बसों का संचालन होना था। उसके लिए राज्य परिवहन प्राधिकरण ने मानदंड तय किए थे। मामले में तीन बस ऑपरेटर्स के वाहन मानदंडों पर खरे उतरे तो उन्हें संचालन की अनुमति दे दी गई।
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जबकि, तीन वाहन ऑपरेटर्स को 45 दिन का समय देते हुए मानदंडों के आधार पर वाहनों की व्यवस्था के निर्देश दिए थे। लेकिन इन तीनों वाहन आपरेटरों ने इस फैसले को लेकर राज्य परिवहन अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष चुनौती दी और जब वहां से राहत नहीं मिली तो हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।
विरोधी पक्ष के अधिवक्ता गिरीश कुमार मालवीय का कहना था कि मामला अपीलीय न्यायाधिकरण ने तय कर दिया था। इसलिए इसमें कुछ बचा नहीं है। जबकि याची पक्ष के अधिवक्ताओं के तर्कों को कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया और राज्य परिवहन अपीलीय न्यायाधिकरण के आदेश को सही मानते हुए याचिकाओं को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने अपीलीय न्यायाधिकरण के आदेश को चस्पा करने का भी निर्देश दिया।