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High Court : गलत अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट देने पर स्कैनिंग सेंटर को ब्याज समेत रकम लौटाने का आदेश

Sat, 06 Jun 2026 06:08 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 06 Jun 2026 06:08 PM IST
सार

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने पित्ताशय में 15 सेंटीमीटर की पथरी बताए जाने वाली अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट दूसरी जांच में गलत साबित होने पर स्कैनिंग सेंटर को सेवा में कमी का दोषी माना है।

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High Court orders scanning centre to refund money along with interest for giving wrong ultrasound report
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने पित्ताशय में 15 सेंटीमीटर की पथरी बताए जाने वाली अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट दूसरी जांच में गलत साबित होने पर स्कैनिंग सेंटर को सेवा में कमी का दोषी माना है। आयोग ने सेंटर को उपभोक्ता से लिया गया शुल्क आठ प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है।

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यह आदेश आयोग के अध्यक्ष मोहम्मद इब्राहीम और सदस्य सरला की पीठ ने ख्वाजा शमशाद अहमद की ओर से दायर परिवाद पर दिया। झूंसी क्षेत्र के कनिहार निवासी ख्वाजा शमशाद अहमद ने आरोप लगाया था कि 13 अगस्त 2019 को वह अपनी पत्नी का अल्ट्रासाउंड कराने के लिए मेडिकल कॉलेज के सामने स्थित एक स्कैनिंग सेंटर गए थे। इसके लिए उनसे 1500 रुपये शुल्क लिया गया था। अगले दिन मिली रिपोर्ट में उनकी पत्नी के पित्ताशय में 15 सेंटीमीटर की पथरी दर्शाया गया, जिसे देखकर चिकित्सक भी हैरान रह गए।
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याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि चिकित्सक की सलाह पर दूसरी जगह अल्ट्रासाउंड कराया गया। जहां की रिपोर्ट में पहले बताए गए निष्कर्ष की पुष्टि नहीं हुई। इसके बाद याची ने स्कैनिंग सेंटर से शिकायत की। सेंटर के कर्मचारियों ने रिपोर्ट में दर्ज आकार को पेन से सुधारने का प्रयास किया। लेकिन अपनी गलती स्वीकार नहीं की और न ही जमा की गई रकम वापस की।
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आयोग ने कहा कि स्कैनिंग सेंटर की ओर से जारी रिपोर्ट में गंभीर त्रुटि थी। रिपोर्ट तैयार करने में लापरवाही बरती गई। आयोग ने स्कैनिंग सेंटर को निर्देश दिया कि वह दो माह के भीतर अल्ट्रासाउंड शुल्क 1500 रुपये परिवाद दाखिल किए जाने की तिथि से अंतिम भुगतान तक आठ प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज सहित वापस करे। साथ ही याची को मानसिक एवं आर्थिक क्षतिपूर्ति के रूप में 1000 रुपये और वाद व्यय के रूप में 500 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया।

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