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हाईकोर्ट का आदेश : पत्नी को प्रति माह 10 हजार रुपये दिया जाए गुजारा भत्ता, कोर्ट ने खारिज की पति की दलील

Sat, 16 Mar 2024 01:49 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 16 Mar 2024 01:49 PM IST
सार

कोर्ट ने कल्याण डे चौधरी बनाम रीता डे चौधरी मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र किया। जिसमें पति के शुद्ध वेतन का 25% पत्नी को भरण-पोषण के रूप में दिए जाने का आदेश है। कोर्ट ने एक नवंबर 2022 के आदेश को रद्द कर दिया।

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High Court order: Wife should be given maintenance allowance of Rs 10 thousand per month
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आपराधिक पुनरीक्षण की सुनवाई करते हुए कहा कि पति की शुद्ध मासिक आय में व्यक्तिगत लोन की ईएमआई भी जोड़ी जाएगी। इस आधार पर कोर्ट ने पति की आय 43,020 रुपये प्रति माह माना। मासिक आय का 25 प्रतिशत लगभग 10 हजार रुपये पत्नी को गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया। बकाया राशि चार माह के भीतर चार समान किश्तों में दिया जाए। मासिक भत्ता महीने की सात तारीख तक भुगतान किया जाए। यह फैसला न्यायमूर्ति सुरेंद्र सिंह-प्रथम की पीठ ने सुनाया।

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मामले में अमरोह निवासी राखी ने प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय, अमरोहा के एक नवंबर 2022 के आदेश को चुनौती देते हुए रिवीजन दाखिल किया था। इसके तहत निर्धारित भत्ता पांच हजार रुपये को बढ़ाने की मांग की गई। राखी के अधिवक्ता ने कहा कि पति की मासिक आय को देखते हुए निर्धारित गुजारा भत्ता काफी कम है। महिला के पति भारतीय नौसेना में हैं। उनकी मासिक आय लगभग 35 से 40 हजार है। इस हिसाब से गुजारा भत्ता काफी कम है। वहीं विपक्षी के अधिवक्ता ने कहा कि आपराधिक पुनरीक्षण इस न्यायालय में सुनवाई योग्य नहीं है। इसके अलावा अन्य कई तर्क रखे।
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कोर्ट ने कल्याण डे चौधरी बनाम रीता डे चौधरी मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र किया। जिसमें पति के शुद्ध वेतन का 25% पत्नी को भरण-पोषण के रूप में दिए जाने का आदेश है। कोर्ट ने एक नवंबर 2022 के आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही पति की आय में व्यक्तिगत लोन की ईएमआई नौ हजार रुपये जोड़ते हुए मासिक आय 43,020 रुपये माना, और इसका 25 प्रतिशत लगभग 10 हजार रुपये गुजारा भत्ता पत्नी को दिए जाने का आदेश दिया।

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