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अल्पसंख्यक संस्थाएं आरक्षण लागू करने को बाध्य नहीं: हाईकोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 22 Jun 2015 11:43 PM IST
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हाईकोर्ट ने कहा है कि गैर वित्त पोषित अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थाओं को आरक्षण कोटा लागू करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है। उनसे यह नहीं कहा जा सकता कि अल्प संख्यकों के लिए आरक्षित 50 प्रतिशत सीटों पर अनिवार्य रूप से अल्पसंख्यकों को ही दाखिल दें। संस्थान अपनी मर्जी से जिसे चाहें दाखिला दे सकते हैं। वह गैर आरक्षित श्रेणी के सामान्य वर्ग के छात्रों को भी दाखिला दे सकते हैं। अमरोहा के नायब अब्बासी गर्ल्स डिग्री कालेज की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने कालेज के बीएड कोर्स में दाखिला लेने वाले छात्रों को एक जुलाई से प्रारंभ हो रही परीक्षा में शामिल होने की अनुमति प्रदान कर दी है।
याची कालेज का कहना था कि उसे अल्पसंख्यक संस्था का दर्जा प्राप्त है। उसके यहां बीएड की सौ सीटें स्वीकृत हैं जिनमें से उसने 42 अल्पसंख्यक छात्रों को दाखिला दिया है, शेष सीटों पर गैर अल्पसंख्यक छात्र हैं। रूहेलखंड विश्वविद्यालय ने इस आधार पर छात्रों को बीएड परीक्षा में शामिल करने से इंकार कर दिया कि संस्थान ने निर्धारित 50 प्रतिशत अल्पसंख्यक कोटे को पूरा नहीं किया है। अल्पसंख्यक कोटे की आठ सीटों पर गैर अल्पसंख्यक छात्रों को दाखिला देने से ऐसा किया गया है।
कोर्ट ने कहा कि ऐसा कोई कानून नहीं है कि अल्पसंख्यक कालेज कोटे की सीटों पर गैर अल्पसंख्यक छात्रों का दाखिला नहीं ले सकते हैं। संस्थान अपनी मर्जी से दाखिला लेने को स्वतंत्र हैं। हालांकि अदालत ने प्रदेश सरकार के स्थायी अधिवक्ता बीपी कछवाह का इस मामले में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। संस्थान के बीएड कोर्स के छात्रों को एक जुलाई से होने वाली परीक्षा में शामिल करने का निर्देश दिया है।
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याची कालेज का कहना था कि उसे अल्पसंख्यक संस्था का दर्जा प्राप्त है। उसके यहां बीएड की सौ सीटें स्वीकृत हैं जिनमें से उसने 42 अल्पसंख्यक छात्रों को दाखिला दिया है, शेष सीटों पर गैर अल्पसंख्यक छात्र हैं। रूहेलखंड विश्वविद्यालय ने इस आधार पर छात्रों को बीएड परीक्षा में शामिल करने से इंकार कर दिया कि संस्थान ने निर्धारित 50 प्रतिशत अल्पसंख्यक कोटे को पूरा नहीं किया है। अल्पसंख्यक कोटे की आठ सीटों पर गैर अल्पसंख्यक छात्रों को दाखिला देने से ऐसा किया गया है।
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कोर्ट ने कहा कि ऐसा कोई कानून नहीं है कि अल्पसंख्यक कालेज कोटे की सीटों पर गैर अल्पसंख्यक छात्रों का दाखिला नहीं ले सकते हैं। संस्थान अपनी मर्जी से दाखिला लेने को स्वतंत्र हैं। हालांकि अदालत ने प्रदेश सरकार के स्थायी अधिवक्ता बीपी कछवाह का इस मामले में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। संस्थान के बीएड कोर्स के छात्रों को एक जुलाई से होने वाली परीक्षा में शामिल करने का निर्देश दिया है।
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