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Prayagraj News: जेल में बंद आरोपी की अग्रिम जमानत मंजूर नहीं
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नोट--नोएडा/गाजियाबाद के लिए विशेष
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जेल में बंद अभियुक्त की अन्य केस
में अग्रिम जमानत अर्जी पोषणीय नहीं
- हाईकोर्ट ने खारिज की भ्रष्टाचार, षड्यंत्र, धोखाधड़ी के आरोपी की अग्रिम जमानत अर्जी
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि कोई अभियुक्त पहले से अन्य मामले में पुलिस या न्यायिक अभिरक्षा में गिरफ्तार होकर जेल में बंद है तो उसकी दूसरे दर्ज मामले में अग्रिम जमानत अर्जी पोषणीय नहीं है। कोर्ट ने सीबीआई के वरिष्ठ अधिवक्ता ज्ञान प्रकाश तथा संजय यादव की अग्रिम जमानत अर्जी की पोषणीयता पर की गई आपत्ति को सही करार देते हुए धोखाधड़ी, षड्यंत्र, भ्रष्टाचार के आरोपी राजेश कुमार शर्मा की अर्जी खारिज कर दी है।
यह आदेश न्यायमूर्ति समित गोपाल ने राजेश कुमार शर्मा की अग्रिम जमानत अर्जी पर दिया है। मालूम हो कि 29 जून 19 को कॉर्पोरेशन बैंक, नई दिल्ली, उत्तर के जोनल हेड तथा उप महाप्रबंधक वीना वाहिद ने सीबीआई ईओ थाना, नई दिल्ली में नौ लोगों के खिलाफ एफ आईआर दर्ज कराई। इसमें मेसर्स नेफ्टो गेज इंडिया प्रा.लि. महरूम बेवा, दीपक गुप्ता, सीमा गुप्ता, राममूर्ति देवी, विजय कुमार, व्यास देव, रविंदर पंडिता तथा गंगाधरन पर षड्यंत्र, धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार जैसे गंभीर आरोप लगाये।
इन लोगों ने बैंक की नोएडा मिड शाखा से धोखाधड़ी की। सीबीआई ने 16 लोगों के खिलाफ विवेचना कर सीबी आई अदालत गाजियाबाद में चार्जशीट दाखिल की। कोर्ट ने उस पर संज्ञान लेकर समन जारी किया है। इसमें याची भी आरोपित है। हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल की गई थी।
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सीबीआई अधिवक्ता की आपत्ति थी कि हरियाणा के थाना साइबर क्राइम, चंडीगढ़ में दर्ज आपराधिक मामले में याची जेल में बंद है और उसने नई दिल्ली में दर्ज मामले में अग्रिम जमानत पर रिहाई की अर्जी दाखिल की है। सुप्रीम कोर्ट के सुनील कालानी केस के फैसले के अनुसार जेल में बंद अभियुक्त को दूसरे मामले में अग्रिम जमानत पाने का अधिकार नहीं है। ऐसी अर्जी पोषणीय नहीं है।
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जेल में बंद अभियुक्त की अन्य केस
में अग्रिम जमानत अर्जी पोषणीय नहीं
- हाईकोर्ट ने खारिज की भ्रष्टाचार, षड्यंत्र, धोखाधड़ी के आरोपी की अग्रिम जमानत अर्जी
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि कोई अभियुक्त पहले से अन्य मामले में पुलिस या न्यायिक अभिरक्षा में गिरफ्तार होकर जेल में बंद है तो उसकी दूसरे दर्ज मामले में अग्रिम जमानत अर्जी पोषणीय नहीं है। कोर्ट ने सीबीआई के वरिष्ठ अधिवक्ता ज्ञान प्रकाश तथा संजय यादव की अग्रिम जमानत अर्जी की पोषणीयता पर की गई आपत्ति को सही करार देते हुए धोखाधड़ी, षड्यंत्र, भ्रष्टाचार के आरोपी राजेश कुमार शर्मा की अर्जी खारिज कर दी है।
यह आदेश न्यायमूर्ति समित गोपाल ने राजेश कुमार शर्मा की अग्रिम जमानत अर्जी पर दिया है। मालूम हो कि 29 जून 19 को कॉर्पोरेशन बैंक, नई दिल्ली, उत्तर के जोनल हेड तथा उप महाप्रबंधक वीना वाहिद ने सीबीआई ईओ थाना, नई दिल्ली में नौ लोगों के खिलाफ एफ आईआर दर्ज कराई। इसमें मेसर्स नेफ्टो गेज इंडिया प्रा.लि. महरूम बेवा, दीपक गुप्ता, सीमा गुप्ता, राममूर्ति देवी, विजय कुमार, व्यास देव, रविंदर पंडिता तथा गंगाधरन पर षड्यंत्र, धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार जैसे गंभीर आरोप लगाये।
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इन लोगों ने बैंक की नोएडा मिड शाखा से धोखाधड़ी की। सीबीआई ने 16 लोगों के खिलाफ विवेचना कर सीबी आई अदालत गाजियाबाद में चार्जशीट दाखिल की। कोर्ट ने उस पर संज्ञान लेकर समन जारी किया है। इसमें याची भी आरोपित है। हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल की गई थी।
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सीबीआई अधिवक्ता की आपत्ति थी कि हरियाणा के थाना साइबर क्राइम, चंडीगढ़ में दर्ज आपराधिक मामले में याची जेल में बंद है और उसने नई दिल्ली में दर्ज मामले में अग्रिम जमानत पर रिहाई की अर्जी दाखिल की है। सुप्रीम कोर्ट के सुनील कालानी केस के फैसले के अनुसार जेल में बंद अभियुक्त को दूसरे मामले में अग्रिम जमानत पाने का अधिकार नहीं है। ऐसी अर्जी पोषणीय नहीं है।