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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court: Mother broke relationship with sons in court filled, said - I have nothing to do with

हाईकोर्ट : भरी अदालत में मां ने बेटों से तोड़ा रिश्ता, कहा-मुझसे कोई वास्ता नहीं

Sun, 08 May 2022 12:04 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 08 May 2022 12:04 AM IST
सार

कोर्ट ने कहा कि उसे बच्चों से मिलने नहीं दिया जाएगा तो मां ने कहा कि मंजूर है। उसने यह भी कहा कि उसे किसी ने बंधक नहीं बनाया है। वह दिल्ली में रहकर प्राइवेट जॉब कर रही है।

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High Court: Mother broke relationship with sons in court filled, said - I have nothing to do with
हाईकोर्ट। - फोटो : amar ujala

विस्तार

फतेहपुर के युवक की ओर से पत्नी के लिए दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान पत्नी ने अपने दो मासूम बच्चों से रिश्ता तोड़ दिया और कहा कि उसका दोनों बच्चों से कोई वास्ता नहीं है।

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कोर्ट ने कहा कि उसे बच्चों से मिलने नहीं दिया जाएगा तो मां ने कहा कि मंजूर है। उसने यह भी कहा कि उसे किसी ने बंधक नहीं बनाया है। वह दिल्ली में रहकर प्राइवेट जॉब कर रही है। उसके जवाब के बाद कोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को पोषणीय नहीं मानते हुए खारिज कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति राहुल चतुर्वेदी ने प्रमोद कुमार व तीन अन्य की याचिका पर दिया।
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मामले में पति प्रमोद कुमार ने पत्नी क्रांति देवी को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की थी। पति का कहना था कि उसकी पत्नी क्रांति को अंकुर ने दिल्ली में बंधक बना रखा है। उसे छोड़ नहीं रहा है। वह वहीं कैद है। कोर्ट ने पुलिस को निर्देश देते हुए पत्नी को कोर्ट में पेश करने को कहा था।

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कोर्ट ने कहा उसे बच्चों से नहीं मिलने दिया जाएगा- महिला बोली मंजूर है

सुनवाई के दौरान पत्नी कोर्ट में उपस्थित हुई तो कोर्ट ने उससे कई सवाल किए। कोर्ट ने पूछा कि क्या उसे किसी ने बंधक बनाया है, तो महिला ने कहा कि उसे किसी ने बंधक नहीं बनाया है। वह दिल्ली में रहकर जॉब कर रही है। पति उसे परेशान करता है। उसका प्रमोद कुमार से कोई लेनादेना नहीं है। सुनवाई केदौरान पति और उसकेदोनों बच्चे वैभव (9 वर्ष) और शौर्य (5 वर्ष और एक पैर से दिव्यांग) भी मौजूद थे।


कोर्ट ने पूछा अपने बच्चों को साथ रखोगी तो महिला ने इनकार करते हुए कहा कि उसका बच्चों से कोई वास्ता नहीं है। इस पर कोर्ट ने कहा कि उसे बच्चों से मिलने नहीं दिया जाएगा तो महिला ने जवाब दिया कि मंजूर है। कोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को पोषणीय न पाते हुए उसे खारिज कर दिया। बच्चों को उसके पिता के पास ही रहने दिया।

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