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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court: Merely working for a long time or receiving salary for a few years does not make an illegal

High Court : केवल लंबे समय तक कार्य करने या कुछ वर्षों तक वेतन मिलने से कोई अवैध नियुक्ति वैध नहीं हो जाती

Fri, 29 May 2026 07:32 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 29 May 2026 07:32 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि केवल लंबे समय तक नौकरी करने या कुछ वर्षों तक वेतन पाने भर से कोई अवैध नियुक्ति वैध नहीं हो जाती। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि नियुक्ति नियमों और वैधानिक प्रक्रिया के विपरीत हुई है।

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High Court: Merely working for a long time or receiving salary for a few years does not make an illegal
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि केवल लंबे समय तक नौकरी करने या कुछ वर्षों तक वेतन पाने भर से कोई अवैध नियुक्ति वैध नहीं हो जाती। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि नियुक्ति नियमों और वैधानिक प्रक्रिया के विपरीत हुई है, तो समय बीतने या सेवा जारी रहने के आधार पर उसे कानूनी संरक्षण नहीं दिया जा सकता।

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इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने धर्मेन्द्र कुमार जनता लघु माध्यमिक विद्यालय, सतगुर मुजुरी, महाराजगंज में वर्ष 1996 में हुई सहायक अध्यापकों की नियुक्तियों को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता यह साबित करने में विफल रहे कि उनकी नियुक्तियां विधिवत स्वीकृत पदों पर और निर्धारित नियमों के अनुसार हुई थीं। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकलपीठ ने अमर प्रकाश चंद्र और तीन अन्य की याचिका पर दिया है।

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याचियों ने कहना था कि उन्हें विधिवत चयन प्रक्रिया के बाद नियुक्त किया गया था और वर्ष 2000 तक नियमित वेतन भी मिलता रहा। बाद में विभागीय जांच के नाम पर उनका वेतन रोक दिया गया। उन्होंने अदालत से अगस्त 2000 से लंबित वेतन और सेवानिवृत्ति लाभ जारी करने की मांग की थी।

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वहीं, राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि जिन पदों पर नियुक्तियां की गईं, उनके सृजन संबंधी अभिलेख संदिग्ध हैं। कई आदेश विभागीय डिस्पैच रजिस्टर में दर्ज नहीं मिले और कुछ दस्तावेज प्रथम दृष्टया फर्जी प्रतीत हुए। सरकार का यह भी कहना था कि नियुक्तियों में निर्धारित प्रक्रिया और योग्यता संबंधी नियमों का पालन नहीं किया गया।

कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा यदि पद वर्ष 1980 या 1988 में सृजित हुए थे, तो कानून के अनुसार तीन महीने के भीतर नियुक्तियां हो जानी चाहिए थीं, जबकि नियुक्तियां वर्ष 1996 में की गईं। इस प्रकार नियुक्तियां उत्तर प्रदेश जूनियर हाईस्कूल वेतन भुगतान अधिनियम, 1978 के तहत विपरीत पाई गईं।

अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि याचिकाकर्ता अगस्त 2000 के बाद वास्तव में कार्यरत रहे या नहीं, इसका कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सके। इसलिए केवल अंतरिम आदेश के आधार पर वेतन का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता। अंत में कोर्ट ने सभी याचिकाएं खारिज करते हुए कहा कि कानून के विरुद्ध की गई नियुक्तियों को केवल सहानुभूति या लंबे समय तक सेवा देने के आधार पर वैध नहीं माना जा सकता।

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