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हाईकोर्ट : पति की हत्या में पत्नी समेत दो अन्य की उम्रकैद की सजा बरकरार
Tue, 05 Apr 2022 12:43 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Tue, 05 Apr 2022 12:43 AM IST
सार
मामले में ओम प्रकाश (मृतक के चचेरे भाई) ने 18 अप्रैल 2004 को एफआईआर दर्ज कराई थी कि भाई की पत्नी ने उसे बताया कि 17 अप्रैल 2004 की मध्यरात्रि में चार व्यक्ति दिल्ली से आए थे।
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allahabad high court
- फोटो : social media
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विस्तार
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 18 साल पहले सहारनपुर में दो अन्य लोगों के साथ मिलकर पति की हत्या करने वाली पत्नी को दी गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में सफल रहा कि हत्या में पत्नी शामिल रही। इस वजह से दोषियों को बरी नहीं किया जा सकता है। यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति ओम प्रकाश त्रिपाठी की खंडपीठ ने सुनीता व अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।
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मामले में ओम प्रकाश (मृतक के चचेरे भाई) ने 18 अप्रैल 2004 को एफआईआर दर्ज कराई थी कि भाई की पत्नी ने उसे बताया कि 17 अप्रैल 2004 की मध्यरात्रि में चार व्यक्ति दिल्ली से आए थे। वे सभी उसके पति को बहुत अच्छी तरह से जानते थे। उन्होंने उसे नशीला पदार्थ पिलाया और उसकी हत्या कर दी।
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जांच पूरी होने के बाद जांच अधिकारी ने धारा 302 के तहत आरोप पत्र दाखिल किया। मामले में विशेष अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सहारनपुर की अदालत ने धारा 302/34 आईपीसी के तहत याचियों सुनीता, अमित चोपड़ा और राजू को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। याचियों की ओर से सत्र न्यायालय केफैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।
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गवाहों और बयानों के मद्देनजर कोर्ट इस निष्कर्ष पर पहुंची कि अभियोजन पक्ष अपराध के मकसद को साबित करने में सफल रहा। मृतक की पत्नी के अमित चोपड़ा और राजू के साथ अवैध संबंध थे। इस वजह से वे दिल्ली से सहारनपुर आए और पति की बेरहमी से हत्या कर दी गई। कोर्ट ने यह पाया कि घटना केसमय पत्नी कमरे में मौजूद थी। उसने अन्य आरोपियों के साथ पति की जान बचाने केलिए कोई संघर्ष नहीं किया। कोर्ट ने सबूतों और गवाहों के बयानों को सही पाते हुए आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा।