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UP : हाईकोर्ट ने सहारनपुर के सीएमओ पर लगाया एक लाख का जुर्माना, आदेश का अनुपालन न करने पर कोर्ट सख्त

Wed, 18 Dec 2024 11:51 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 18 Dec 2024 11:51 AM IST
सार

सहारनपुर में बाजोरिया रोड स्थित डॉ. अंशुल गुप्ता ने किराये का भवन लेकर अनाया हेल्थ सेंटर खोला था। किराया-विलेख की समाप्ति के बाद मकान मालिक ने परिसर खाली करने के लिए कहा। जबकि, याची ने उक्त परिसर पर कब्जा जारी रखा गया।

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High Court imposed a fine of one lakh on Saharanpur CMO, the court is strict on non-compliance of the order.
अदालत (सांकेतिक) - फोटो : ANI

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आदेश के बाद भी अस्पताल के लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं करने पर सहारनपुर के सीएमओ पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया। कहा है कि सीएमओ आदेश व कानून की अनदेखी कर रहे हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति डोनादी रमेश की खंडपीठ ने सहारनपुर के अनाया हेल्थ सेंटर व अन्य की दाखिल याचिका पर दिया।

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सहारनपुर में बाजोरिया रोड स्थित डॉ. अंशुल गुप्ता ने किराये का भवन लेकर अनाया हेल्थ सेंटर खोला था। किराया-विलेख की समाप्ति के बाद मकान मालिक ने परिसर खाली करने के लिए कहा। जबकि, याची ने उक्त परिसर पर कब्जा जारी रखा गया। वहीं, मकान मालिक उषा गुप्ता ने बेदखली आवेदन दायर किया है। याची ने सिविल जज (सीनियर डिवीजन) में वाद दाखिल किया।
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कोर्ट ने 23 फरवरी 2024 के आदेश से अस्थायी निषेधाज्ञा आदेश जारी कर दिया। इस दौरान याची ने सीएमओ कार्यालय में अस्पताल के नवीनीकरण के लिए आवेदन किया। मकान मालिक ने इसके खिलाफ मंडलायुक्त के यहां प्रार्थना पत्र दिया। मंडलायुक्त के निर्देश पर सीएमओ ने लाइसेंस नवीनीकरण के आवेदन को खारिज कर दिया। कहा कि विवादित परिसर के संबंध में किराया-विलेख की प्रति दाखिल नहीं की है। हाईकोर्ट की एक याचिका पर भी ध्यान नहीं दिया गया। इस पर याची ने हाईकोर्ट में एक और याचिका दाखिल की।

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याची अधिवक्ता अजय कुमार सिंह, आशीष सिंह ने दलील दी कि न्यायालय के पहले के आदेश का उल्लंघन किया गया है। रेंट-डीड के मौजूद न होने या वेब-पोर्टल पर अपलोड न होने के कारण पंजीकरण के नवीनीकरण से इन्कार नहीं किया जा सकता है।

न्यायालय ने कहा कि सिविल कोर्ट ने अस्थायी निषेधाज्ञा आदेश जारी किया। इसके बाद भी नवीनीकरण आवेदन को अस्वीकार कर दिया गया। सीएमओ के जानबूझकर कानून का उल्लंघन करने पर याची को अनावश्यक रूप से दो बार इस न्यायालय में आना पड़ा। न्यायालय ने याचिका स्वीकार कर सीएमओ को निर्देश दिया कि वह अस्पताल के पंजीकरण को तुरंत नवीनीकृत करें। यह आदेश सिविल जज (सीनियर डिवीजन), बेदखली आवेदन के फैसले के अधीन है।

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