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High Court: हाईकोर्ट ने यूपी सरकार पर लगाया पांच लाख का जुर्माना, निस्तारित मामले को चुनौती देने पर कोर्ट सख्त
Fri, 19 Apr 2024 01:14 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 19 Apr 2024 01:14 PM IST
सार
निस्तारित मामले को सीआरपीसी के तहत चुनौती देने के मामले को गंभीरता से लेते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार पर पांच लाख का जुर्माना लगाया है।
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अदालत का आदेश
- फोटो : istock
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मध्यस्थता एवं सुलह समझौता अधिनियम की धारा 36 के तहत निस्तारित मामले को सिविल प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 47 के तहत चुनौती देने पर यूपी सरकार पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। न्यायमूर्ति शेखर बी सर्राफ ने बिजनौर के राजबीर सिंह के खिलाफ दाखिल यूपी सरकार की अपील को खारिज करते हुए यह आदेश दिया।
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प्रतिवादी राजबीर सिंह ने बिजनौर में मध्य गंगा नहर के दूसरे चरण की परियोजना के तहत मुख्य नहर पर ड्रेनेज और साइफन के निर्माण का अनुबंध किया था। विवाद होने पर मामला मध्यस्थता न्यायालय पहुंचा, जिसे खारिज कर दिया गया। फिर, प्रकरण हाईकोर्ट पहुंचा।
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2018 में यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक विशेष याचिका दाखिल की, जिसे देरी के आधार पर खारिज कर दिया गया। सरकार को समझौता याचिका में राहत भी नहीं मिली। इसके बाद वाणिज्यिक न्यायालय मुरादाबाद में वाद दायर किया गया। इस कोर्ट ने प्रतिवादी के पक्ष में फैसला करते हुए अवार्ड राशि को ब्याज सहित भुगतान का आदेश दिया गया।
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इसके खिलाफ यूपी सरकार ने सीआरपीसी की धारा 47 के तहत हाईकोर्ट में चुनौती दी, जिसे खारिज करते हुए अदालत ने जुर्माना लगाया। कोर्ट ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 47 के तहत मध्यस्थता अवार्ड को चुनौती देना अनुचित है।