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High Court : फर्जी दस्तावेज के आधार पर दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज, 25 हजार जुर्माना
Thu, 16 Apr 2026 03:07 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 16 Apr 2026 03:07 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रयागराज निवासी अनुज पांडेय की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज कर दी। साथ ही न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की पीठ ने 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
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अदालत।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रयागराज निवासी अनुज पांडेय की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज कर दी। साथ ही न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की पीठ ने 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। अनुज ने पत्नी को अवैध हिरासत में रखने का आरोप लगाकर याचिका दायर की थी।
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याची ने आरोप लगाया था कि पत्नी को ससुर और साले ने अवैध हिरासत में रखा है। याचिका में पत्नी को भी याची बनाया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि याची ने पत्नी की सहमति के बिना ही इस मामले में उसे दूसरे याचिकाकर्ता के रूप में शामिल किया था। पत्नी के वकील ने अदालत को सूचित किया कि पति ने डरा-धमकाकर और धोखाधड़ी से उनके हस्ताक्षर प्राप्त किए थे। पत्नी ने स्वयं उसके खिलाफ गंभीर शिकायतों के साथ प्राथमिकी भी दर्ज कराई है।
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कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता का लंबा आपराधिक इतिहास है। उसके खिलाफ हत्या के प्रयास, धोखाधड़ी, गैंगस्टर एक्ट और आर्म्स एक्ट के तहत कई मामले लंबित हैं। उसके खिलाफ 15,000 रुपये का इनाम भी घोषित है।
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कोर्ट ने प्रयागराज पुलिस को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता की गतिविधियों पर कम से कम एक वर्ष तक कड़ी निगरानी रखे। यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि यदि वह किसी भी गैर-कानूनी गतिविधि में शामिल पाया जाता है या अपनी पत्नी की सुरक्षा के लिए खतरा बनता है तो उसकी जमानत रद्द करने की प्रभावी कार्रवाई की जाए। इसके अतिरिक्त कोर्ट ने प्रयागराज के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट से दो महीने के भीतर अनुज पांडेय के खिलाफ चल रहे मामलों की प्रगति रिपोर्ट भी मांगी है।