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High Court : भरण पोषण के लिए पत्नी को बार-बार मुकदमा दाखिल करने के लिए बाध्य करना गलत
Sun, 26 Jul 2026 07:28 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 26 Jul 2026 07:28 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी को भरण पोषण देना एक सतत प्रक्रिया है। इसे हासिल करने के लिए पत्नी को बार- बार मुकदमा दाखिल करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी को भरण पोषण देना एक सतत प्रक्रिया है। इसे हासिल करने के लिए पत्नी को बार- बार मुकदमा दाखिल करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरी की एकल पीठ ने गाजीपुर निवासी पति को जौनपुर परिवार न्यायालय की ओर से प्रदान की गई भरण पोषण की बकाया राशि भुगतान करने का आदेश दिया है।
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कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि भरण पोषण के आदेश का निष्पादन करने के लिए पत्नी को बार-बार अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर किए बिना आगे भी पति को भरण पोषण के पांच हजार रुपए प्रतिमाह अदा करते रहना होगा मामले के मुताबिक याची पत्नी ने 11 मई 2018 को जौनपुर की परिवार अदालत में भरण-पोषण का मुकदमा दाखिल किया था। अदालत ने पति की मार्च 2023 में पत्नी के पक्ष में आदेश देते हुए पति को आवेदन की तारीख से प्रतिमाह पांच हजार रुपये अदा करने का आदेश दिया था। इसके बाद पति ने बकाया अदा किया लेकिन आगे भरण पोषण देना जारी नहीं रखा। इसके खिलाफ पत्नी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
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कोर्ट ने याचिका निस्तारित करते हुए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला दिया। कहा, कि भरण-पोषण की राशि सीधे पत्नी के बैंक खाते में जमा कराई जानी चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि पति नौकरीपेशा या वेतनभोगी है, तो संबंधित विभाग या नियोक्ता सीधे उसके वेतन से राशि काटकर पत्नी के बैंक खाते में स्थानांतरित करें। यदि कोई व्यक्ति भरण-पोषण देने से इनकार करता है, तो उसकी संपत्ति कुर्क की जा सकती है। साथ ही लापरवाही करने वाले पति को प्रत्येक महीने के लिए एक महीने तक के साधारण कारावास की सजा दी जा सकती है।
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कोर्ट ने अपने आदेश की प्रतिलिपि अनुपालन के लिए जौनपुर के जिला एवं सत्र न्यायाधीश, परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश और शैक्षणिक व अनुसंधान के लिए लखनऊ स्थित न्यायिक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान भेजने का आदेश भी दिया है।