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UP : कलेक्टर के पत्र में  आयुक्त को माननीय लिखने पर हाईकोर्ट ने जताई हैरानी, पूछा- सरकारी अधिकारी माननीय कैसे

Thu, 26 Sep 2024 02:59 PM IST
विनोद सिंह सुनील यादव, संवाद न्यूज एजेंसी
सुनील यादव, संवाद न्यूज एजेंसी Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 26 Sep 2024 02:59 PM IST
सार

high court allahabad : सरकारी अधिकारियों के नाम के आगे माननीय शब्द जोड़े जाने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हैरानी जताते हुए कहा कि अधिकारी किस प्रोटोकाल के तहत माननीय हो गए। डीएम इटावा ने कमिश्नर को भेजे एक पत्र में उनको माननीय शब्द से संबोधित किया है। इस पर हाईकोर्ट ने सख्त आपत्ति जताई है। 

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High Court expressed surprise at the writing of Honorable Commissioner in Collector's letter
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी अधिकारियों के नाम से पहले माननीय शब्द जोड़े जाने को लेकर हैरानी जताई है। कोर्ट ने राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव से पूछा है कि राज्य के सरकारी अधिकारी माननीय कैसे हैं? किस प्रोटोकॉल के तहत वे अपने पदनाम या नाम के साथ माननीय शब्द लगाने के हकदार हैं।

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यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की अदालत ने कृष्ण गोपाल राठौर की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि सरकारी पत्राचार में राज्य के विभिन्न रैंक के अधिकारियों के नाम के साथ माननीय शब्द का उल्लेख नियमित रूप से किया जा रहा है। मौजूदा मामले में भी मंडलायुक्त कानपुर को लिखे पत्र में इटावा के कलेक्टर ने माननीय आयुक्त के रूप में संदर्भित किया था।

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कोर्ट ने कहा कि यह हैरानी वाली बात है कि राज्य के मंत्री व अन्य संप्रभु पदाधिकारियों के लिए प्रयोग किया जाने वाला माननीय शब्द का प्रयोग राज्य सरकार के अधीन सेवारत अधिकारी के लिए कैसे किया जा रहा है। कोर्ट ने राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव से हलफनामे पर उस प्रोटोकॉल की जानकारी तलब की है, जिसके तहत राज्य के अधिकारी अपने नाम के साथ माननीय शब्द उपसर्ग के रूप में जोड़ने के हकदार हैं। कोर्ट ने रजिस्ट्रार (अनुपालन) को आदेश की प्रति 24 घंटे के भीतर लखनऊ व इटावा के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के जरिये राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव और कलेक्टर इटावा को भेजने का आदेश दिया है। 

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