फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court expressed displeasure: Said- Lawyers should cooperate in court proceedings, not obstruct

हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी : कहा- वकीलों को अदालत की कार्यवाही में सहयोग करना चाहिए, व्यवधान नहीं

Mon, 28 Jul 2025 07:23 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 28 Jul 2025 07:23 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि वकीलों को अदालत की कार्यवाही को व्यवस्थित और सम्मानजनक बनाए रखने में सहयोग करना चाहिए न कि उसमें व्यवधान डालें।

विज्ञापन
High Court expressed displeasure: Said- Lawyers should cooperate in court proceedings, not obstruct
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि वकीलों को अदालत की कार्यवाही को व्यवस्थित और सम्मानजनक बनाए रखने में सहयोग करना चाहिए न कि उसमें व्यवधान डालें। यह तल्ख टिप्पणी कोर्ट ने एक वकील के मुवक्किल की दूसरी जमानत खारिज होने पर उसकी ओर से अदालत कक्ष में बहस जारी रखने पर नाराजगी जताते हुए की। न्यायमूर्ति कृष्ण पहल की पीठ सचिन गुप्ता की जमानत अर्जी पर सुनवाई कर रही थी।

विज्ञापन

गोरखपुर निवासी सचिन पर गोरखनाथ थाने में दुष्कर्म और आईटी एक्ट सहित विभिन्न मामलों में मुकदमा दर्ज है। उसने जमानत के लिए हाईकोर्ट में दूसरी अर्जी दाखिल की। पहली अर्जी पांच सितंबर 2024 को खारिज हुई थी। वकील ने दलील दी कि उनका मुवक्किल दिसंबर 2023 से जेल में है। अब तक केवल दो गवाहों से ही पूछताछ की गई है। ऐसे में मुकदमे के जल्द समाप्त होने की कोई संभावना नहीं है। इन आधारों पर जमानत देने की प्रार्थना की। शासकीय अधिवक्ता ने जमानत अर्जी का विरोध किया।

विज्ञापन

कोर्ट ने कहा कि कारावास की अवधि के अलावा जमानत अर्जी में अन्य कोई नया आधार नहीं है। नतीजतन अदालत ने जमानत अर्जी खारिज कर दी। अर्जी अस्वीकृत होने के बावजूद वकील ने लगातार यह तर्क दिया कि उनके मुवक्किल के पास जमानत का एक मजबूत मामला है। इससे अदालती कार्यवाही में बाधा उत्पन्न हुई। इस व्यवहार पर कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई। साथ ही इसे आपराधिक अवमानना के बराबर बताया लेकिन पीठ ने कार्यवाही शुरू करने से परहेज किया। कोर्ट ने कहा, आदेश पारित होने के बाद किसी भी वादी को न्यायालय की कार्यवाही में हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed