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High Court : सेवानिवृत्ति के बाद वेतन निर्धारण में गलती के आधार पर कर्मचारी के वेतन में कटौती नहीं कर सकते
Wed, 06 May 2026 08:08 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 06 May 2026 08:08 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी भी सरकारी कर्मचारी की सेवानिवृत्ति के बाद वेतन निर्धारण में की गई गलती के आधार पर वेतनमान में कटौती या वसूली की कार्रवाई करना अवैध है।
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अदालत का फैसला।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी भी सरकारी कर्मचारी की सेवानिवृत्ति के बाद वेतन निर्धारण में की गई गलती के आधार पर वेतनमान में कटौती या वसूली की कार्रवाई करना अवैध है। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने सेवानिवृत्ति के बाद याची के वेतनमान में कटौती के लिए जारी आदेश को रद्द कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की एकल पीठ ने दिग्विजय सिंह की याचिका पर दिया है।
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झांसी निवासी याची सब इंस्पेक्टर के पद से सेवानिवृत्त हुआ। इसके बाद याची के वेतन निर्धारण में हुई गलती के आधार पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने 10 अप्रैल 2026 को वेतन कटौती का आदेश जारी कर दिया। इस फैसले को याची ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
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याची अधिवक्ता इरफान अहमद मलिक ने दलील दी कि सेवानिवृत्ति से पहले वेतन तय करने में कोई गलती हुई थी तो 16 जनवरी 2007 के सरकारी आदेश के अनुसार न तो गलती से दिया गया वेतन वापस लिया जा सकता है और न ही पेंशन कम की जा सकती है।
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कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद पाया कि याची का वेतनमान संशोधित करने करने से पहले उन्हें अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया गया था। कोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय की ओर से ''पंजाब राज्य बनाम रफ़ीक मसीह'' मामले में दिए गए फैसले का हवाला दिया। कहा- कि तृतीय श्रेणी और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ने अगर कोई धोखाधड़ी या गलत तथ्य पेश नहीं किए हैं तो सेवानिवृत्त के बाद उनसे कोई भी वसूली नहीं की जा सकती।
इसी के साथ कोर्ट ने झांसी एसएसपी की ओर से जारी विवादित आदेश को रद्द दिया। साथ ही प्रतिवादियों को आदेश दिया है कि वे याची की पेंशन और सेवानिवृत्ति के अन्य सभी लाभों का निर्धारण उनके अंतिम बार प्राप्त किए गए वेतन के आधार पर सुनिश्चित करें।