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हाईकोर्ट : डॉ. एके बंसल हत्याकांड के आरोपी आलोक सिन्हा की जमानत शर्तों के साथ मंजूर
Sun, 12 Dec 2021 09:28 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 12 Dec 2021 09:28 PM IST
सार
याची आलोक कुमार सिन्हा की तरफ से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता वीपी श्रीवास्तव और एडवोकेट अरविंद कुमार पांडेय ने तर्क दिया कि अभियोजन की कहानी पूरी तरह से काल्पनिक है।
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Prayagraj News : Dr. AK Bansal file photo
- फोटो : prayagraj
विस्तार
चर्चित डॉ. एके बंसल हत्याकांड के आरोपी आलोक कुमार सिन्हा की जमानत अर्जी इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंजूर कर ली है। लेकिन, उच्च न्यायालय ने कई शर्तें भी लगाई हैं। जांच में सहयोग करने और साक्ष्यों के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ न करने की हिदायत दी है। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह की एकल खंडपीठ कर रही थी।
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याची आलोक कुमार सिन्हा की तरफ से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता वीपी श्रीवास्तव और एडवोकेट अरविंद कुमार पांडेय ने तर्क दिया कि अभियोजन की कहानी पूरी तरह से काल्पनिक है। याची को केवल इसलिए फंसाया जा रहा है कि डॉ. एके बंसल ने उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। जिसमें याची को जमानत मिल चुकी है। याची को मौजूदा मामले में सह आरोपी शोएब के इकबालिया बयान के माध्यम से झूठा पेश किया गया और उसी के आधार पर याची को पांच अप्रैल 2021 को गिरफ्तार कर लिया गया।
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डॉ. बंसल ने अपने पुत्र के एडमिशन के लिए सिन्हा से किया था संपर्क
अधिवक्ता ने तर्क दिया कि पहले बंसल की ओर से याची के खिलाफ इसलिए आपराधिक मामला दर्ज कराया गया था कि उन्होंने अपने पुत्र के मेडिकल के परास्नातक पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए संपर्क किया था। इस दौरान दोनों के बीच धन संबंधी विवाद उत्पन्न हो गया था। इस मामले में याची जमानत पर है।
इस अकेली घटना के अलावा याची को 12 जनवरी 2017 को हुई घटना से जोड़ने के लिए रिकॉर्ड में कोई सामग्री नहीं है, जिसमें बंसल की उनके चिकित्सा संस्थान के अंदर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसमें सह आरोपी शोएब के बयान की कोई प्रासंगिकता नहीं है। क्योंकि, रिकॉर्ड में उपलब्ध किसी भी सामग्री के साथ इसकी पुष्टि नहीं की गई थी। यह पुलिस हिरासत में दर्ज किया गया इकबालिया बयान है। कोर्ट ने याची के अधिवक्ता के तर्कों को सुनकर जमानत मंजूर कर ली।
अधिवक्ता ने तर्क दिया कि पहले बंसल की ओर से याची के खिलाफ इसलिए आपराधिक मामला दर्ज कराया गया था कि उन्होंने अपने पुत्र के मेडिकल के परास्नातक पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए संपर्क किया था। इस दौरान दोनों के बीच धन संबंधी विवाद उत्पन्न हो गया था। इस मामले में याची जमानत पर है।
इस अकेली घटना के अलावा याची को 12 जनवरी 2017 को हुई घटना से जोड़ने के लिए रिकॉर्ड में कोई सामग्री नहीं है, जिसमें बंसल की उनके चिकित्सा संस्थान के अंदर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसमें सह आरोपी शोएब के बयान की कोई प्रासंगिकता नहीं है। क्योंकि, रिकॉर्ड में उपलब्ध किसी भी सामग्री के साथ इसकी पुष्टि नहीं की गई थी। यह पुलिस हिरासत में दर्ज किया गया इकबालिया बयान है। कोर्ट ने याची के अधिवक्ता के तर्कों को सुनकर जमानत मंजूर कर ली।