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High Court : ई- नीलामी में समय से पहले पोर्टल बंद कर करना अवैधानिक, यूपीसीडा का फैसला रद्द
Fri, 07 Aug 2026 08:12 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 07 Aug 2026 08:12 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि ई-नीलामी में तय समय से पहले पोर्टल बंद कर बोलीदाता को शेष अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट (ईएमडी) जमा करने से रोकना पूरी तरह मनमाना और अवैध है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि ई-नीलामी में तय समय से पहले पोर्टल बंद कर बोलीदाता को शेष अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट (ईएमडी) जमा करने से रोकना पूरी तरह मनमाना और अवैध है। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ ने चंद्रा फैब्रिक्स प्रा. लि. की याचिका स्वीकार करते हुए पहले से जमा ईएमडी जब्त करने वाला औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) का आदेश रद्द कर दिया।
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साथ ही याची को शेष ईएमडी जमा कराने का अवसर देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी बोलीदाता की ईएमडी बिना सुनवाई का अवसर दिए जब्त नहीं की जा सकती। मामला गाजियाबाद स्थित टीडीएस सिटी के औद्योगिक भूखंड की ई-नीलामी से जुड़ा था। याची सबसे ऊंचा बोलीदाता घोषित हुआ था। उसे 20 मार्च 2021 को ईमेल भेजकर 24 मार्च तक शेष ईएमडी जमा करने को कहा गया। याची ने मेडिकल इमरजेंसी के कारण समय बढ़ाने का अनुरोध किया, लेकिन पोर्टल बंद होने से वह भुगतान नहीं कर सका। इसके बाद यूपीसीडा ने उसकी पहले से जमा लगभग 73.22 लाख रुपये की ईएमडी जब्त कर ली। इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
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कोर्ट ने पाया कि नीलामी कैटलॉग की शर्तों के अनुसार शनिवार और रविवार को समय-सीमा की गणना से बाहर रखा जाना था। इस आधार पर भुगतान की अंतिम तिथि 26 मार्च 2021 मानी जाएगी, न कि 24 मार्च। इसलिए 24 मार्च को पोर्टल बंद करना अनुबंध की शर्तों के विपरीत और मनमाना था। कोर्ट ने कहा कि किसी अनुबंध की विभिन्न शर्तों में यदि टकराव प्रतीत हो तो उनकी सामंजस्यपूर्ण व्याख्या की जानी चाहिए, ताकि अनुबंध का उद्देश्य सुरक्षित रहे।
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कोर्ट ने कहा कि यदि किसी प्रशासनिक आदेश से किसी व्यक्ति के अधिकार प्रभावित होते हैं, तो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है। सुनवाई का अवसर दिए बिना ईएमडी जब्त करना कानूनसम्मत नहीं माना जा सकता। लिहाजा, कोर्ट ने यूपीसीडा को निर्देश दिया कि आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के बाद याची को नया ईमेल भेजकर शेष ईएमडी जमा करने का अवसर दिया जाए। वहीं, यह भी स्पष्ट किया कि याची को ईमेल प्राप्त होने के दो दिन के भीतर बकाया राशि जमा करनी होगी।