High Court : चयन प्रक्रिया में असफल होने के बाद अभ्यर्थी विज्ञापन को नहीं दे सकता चुनौती
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राजकीय यूनानी मेडिकल कॉलेजों में रीडर के पद पर नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा, यदि कोई अभ्यर्थी चयन प्रक्रिया में भाग लेता है और असफल हो जाता है तो उसे विज्ञापन की शर्तों या चयन प्रक्रिया की वैधता को चुनौती देने का कोई अधिकार नहीं रह जाता।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राजकीय यूनानी मेडिकल कॉलेजों में रीडर के पद पर नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा, यदि कोई अभ्यर्थी चयन प्रक्रिया में भाग लेता है और असफल हो जाता है तो उसे विज्ञापन की शर्तों या चयन प्रक्रिया की वैधता को चुनौती देने का कोई अधिकार नहीं रह जाता।
यह आदेश न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की पीठ ने प्रयागराज निवासी अभ्यर्थी की ओर से दायर याचिका पर दिया है। याची ने उप्र लोक सेवा आयोग की ओर से 24 सितंबर 2019 को जारी विज्ञापन के तहत राजकीय यूनानी मेडिकल कॉलेजों के लिए रीडर पद के लिए आवेदन किया था। याची साक्षात्कार तक पहुंचीं लेकिन अंतिम चयन सूची में उनका नाम नहीं आया। वहीं, प्रतिवादी को सफल घोषित कर दिया गया। याची ने प्रतिवादी के चयन और भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देते हुए याचिका दायर की।
याची का कहना था कि उनके पास स्नातकोत्तर (पीजी) की डिग्री थी जो एक अधिमान्य योग्यता थी, इसलिए उन्हें कम योग्यता वाले अभ्यर्थी पर वरीयता मिलनी चाहिए थी। अन्य कई दलीलें दीं। कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद विज्ञापन में अनियमितता के आरोपों को नहीं माना।