फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High court bans demolition in Bhowapur colony

गाजियाबाद की भोवापुर बस्ती में ध्वस्तीकरण पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, जीडीए से पुनर्वास योजना पर मांगा जवाब

Wed, 21 Oct 2020 08:05 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 21 Oct 2020 08:05 PM IST
विज्ञापन
High court bans demolition in Bhowapur colony
Court order - फोटो : सोशल मीडिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद, कौशाम्बी में रैडीसन ब्लू होटल के पीछे भोवापुर श्रमिक बस्ती के लोगों को राहत देते हुए बस्ती के ध्वस्तीकरण पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। कोर्ट ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण से इनके पूर्ण पुनर्वास योजना के साथ जवाब मांगा है। साथ ही कोर्ट ने बस्ती के लोगों को बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने के लिए भी कहा है। याचिका की अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी। 
विज्ञापन


देवपाल की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर तथा न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की खंडपीठ का कहना था कि दुनिया भर में कोरोना महामारी फैली है, ऐसे में सभी वर्गों, खास कर कमजोर वर्ग की सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है। कोर्ट ने कहा है कि जिन लोगों के आवास ध्वस्त किए गए हैं, जिला प्रशासन उनके लिए अस्थायी आवास का इंतजाम करे।
विज्ञापन


जीडीए भोवापुर बस्ती के लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पुनर्वास योजना पर विचार करे। तब तक बस्ती के लोगों को मूलभूत सुविधाएं बिजली, पानी, चिकित्सा आदि मुहैया कराई जाए। भोवापुर बस्ती में देश के विभिन्न हस्सों से रोजगार के लिए आने वाले श्रमिकों की बस्ती है। यह बस्ती विकास प्राधिकरण के गठन के समय 1990 से ही अस्तित्व में आ गई थी। उनके पुनर्वास की व्यवस्था किए बगैर ध्वस्तीकरण किया जा रहा है। याची का कहना है कि अभी तक 150 आवास ध्वस्त किए जा चुके हैं। लोग आसमान के नीचे रह रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


जीडीए का कहना है कि अतिक्रमण कर अवैध बस्ती बनाई गई है। हाईकोर्ट ने ही सालिड बेस्ट डिस्पोजल यूनिट स्थापित करने के लिए कार्रवाई का निर्देश दिया है, जिसके तहत ध्वस्तीकरण किया जा रहा है। कोर्ट ने कहा कि पुनर्वास की वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना श्रमिकों को बेदखल करना सही नहीं है। कोर्ट ने प्राधिकरण से पूरी योजना तैयार कर दाखिल करने का निर्देश दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed