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हाईकोर्ट ने पूछा : एसपी भदोही बताएं...दहेज उत्पीड़न में कैसे फंसाए जा रहे हैं पति के रिश्तेदार
Thu, 19 Sep 2024 04:33 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 19 Sep 2024 04:33 PM IST
सार
यह आदेश न्यायमूर्ति राजवीर सिंह की अदालत ने अंकित कुमार दुबे व सात अन्य ओर से आरोप पत्र को चुनौती देने वाली याचिका पर दिया है। मामला भदोही का है। आरोपी पति अंकित की शादी 11 मई 2022 को हुई थी। शादी के कुछ समय बाद अंकित की पत्नी ने पति, दो अविवाहित देवर और दो विवाहित ननद समेत पूरे परिवार के खिलाफ महिला थाने में दहेज उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज कराया।
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हाईकोर्ट
- फोटो : stock.adobe
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दहेज उत्पीड़न के मामले की लचर विवेचना पर भदोही एसपी को कड़ी फटकार लगाते हुए विवेचक को तलब किया है। कोर्ट ने एसपी से पूछा कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश के बावजूद बिना स्पष्ट आरोप के दहेज उत्पीड़न में पति के रिश्तेदार कैसे फंसाए जा रहे हैं।
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यह आदेश न्यायमूर्ति राजवीर सिंह की अदालत ने अंकित कुमार दुबे व सात अन्य ओर से आरोप पत्र को चुनौती देने वाली याचिका पर दिया है। मामला भदोही का है। आरोपी पति अंकित की शादी 11 मई 2022 को हुई थी। शादी के कुछ समय बाद अंकित की पत्नी ने पति, दो अविवाहित देवर और दो विवाहित ननद समेत पूरे परिवार के खिलाफ महिला थाने में दहेज उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज कराया। मामले की विवेचना के बाद विवेचक ने सभी के खिलाफ आरोपपत्र भी दाखिल कर दिया।
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याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि पीड़िता ने पुलिस को दिए बयान में घटना की तारीख का उल्लेख नहीं किया है। जबकि, एफआईआर में कहा है कि 5 जनवरी 2024 को उसे दहेज की मांग को लेकर मारपीट कर घर से निकाल दिया गया। पीड़िता ने सामान्य आरोप लगाते हुए पूरे परिवार को फंसाया है। इसमें दो अविवाहित देवर व दो विवाहित ननद को भी शामिल कर दिया, जो अलग रहते हैं। खफा कोर्ट ने कहा कि लगता है कि विवेचनाधिकारी ने जांच की ही नहीं। मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर नियत कर कोर्ट ने विवेचना अधिकारी को हाजिर होने का आदेश दिया है।
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