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हाईकोर्ट ने पूछा : एसएचओ बताएं...सात साल से कम की सजा वाले अपराध में कैसे की गिरफ्तारी

Sat, 21 Jun 2025 02:32 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 21 Jun 2025 02:32 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साइबर ठगी में 25 हजार के इनामी दो आरोपियों की गिरफ्तारी पर थाना प्रभारी (एसएचओ) ललितपुर को तलब किया है। कोर्ट ने कहा है कि वह अदालत में पेश होकर सफाई दें कि सुप्रीम रोक के बावजूद सात साल से कम सजा वाले अपराध में उन्होंने याचियों की गिरफ्तारी क्यों की?

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High Court asked: SHO should explain...how did you make arrest for a crime punishable with less seven years
अदालत का आदेश - फोटो : istock

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साइबर ठगी में 25 हजार के इनामी दो आरोपियों की गिरफ्तारी पर थाना प्रभारी (एसएचओ) ललितपुर को तलब किया है। कोर्ट ने कहा है कि वह अदालत में पेश होकर सफाई दें कि सुप्रीम रोक के बावजूद सात साल से कम सजा वाले अपराध में उन्होंने याचियों की गिरफ्तारी क्यों की? यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ एवं न्यायमूर्ति हरवीर सिंह की खंडपीठ ने ललितपुर निवासी पुष्पेंद्र उर्फ कल्लू राजा व चाहत राजा बुंदेला की याचिका पर दिया है।

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मामला ललितपुर थाना क्षेत्र का है। आरोप है कि याचियों ने राहुल नाम के युवक से डेयरी फार्म के सरकारी अनुदान के लिए बैंक ऑफ महाराष्ट्र में फर्जी मोबाइल नंबर पर खाता खुलवाया। सीधे साधे लोगों को जाल में फंसाने के आरोपियों पर साइबर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। इसके बाद इनकी गिरफ्तारी की गई। मामले में गिरफ्तारी को अवैध बताकर याचियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
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याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि याचियों पर लगाए गए आरोपों की अधिकतम सजा सात साल की है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से अर्नेश कुमार के मामले में दी गई विधि व्यवस्था के मुताबिक, सात साल से कम की सजा वाले अपराध में गिरफ्तारी नहीं की जा सकती। इसके बावजूद याचियों को गिरफ्तार किया गया, जो अवैधानिक व सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना है। कोर्ट ने सुप्रीम आदेश की अवहेलना पर नाराजगी जता, ललितपुर थाना प्रभारी की 24 जून को अदालत में पेश होकर हलफनामे पर गिरफ्तारी का कारण बताने का आदेश दिया है।

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