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हाईकोर्ट ने पूछा : धर्म परिवर्तन के खिलाफ पुलिस कैसे दर्ज कर रही एफआईआर, कानून के दुरुपयोग पर जताई नाराजगी

Sun, 04 Aug 2024 05:49 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 04 Aug 2024 05:49 PM IST
सार

मामला जौनपुर के केराकत थाना क्षेत्र का है। 12 सितंबर 2023 को थाने के थाना प्रभारी राम जतन यादव ने जौनपुर के ग्राम विक्रमपुर चर्च में धर्म परिवर्तन कराने का आरोप लगाया था। मामले में दुर्गा यादव समेत गोविंद लाल, जितेंद्र कुमार, सुरेंद्र गौतम, ऊषा देवी और श्रवण कुमार के खिलाफ विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कराई थी।

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High Court asked: How is the police registering FIR against religious conversion
अदालत का आदेश - फोटो : istock

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धर्म परिवर्तन कानून के दुरुपयोग पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने प्रमुख सचिव गृह से पूछा है कि सूबे की पुलिस किस अधिकार के तहत धर्म परिर्वतन की एफआईआर दर्ज कर रही है। यह सवाल न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने दुर्गा यादव की ओर से धर्म परिवर्तन अधिनियम के तहत अधीनस्थ न्यायालय में दाखिल आरोप पत्र की वैधता की चुनौती देने वाली याचिका पर पूछा है। याची की ओर से अधिवक्ता अभिषेक यादव ने बहस की।

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मामला जौनपुर के केराकत थाना क्षेत्र का है। 12 सितंबर 2023 को थाने के थाना प्रभारी राम जतन यादव ने जौनपुर के ग्राम विक्रमपुर चर्च में धर्म परिवर्तन कराने का आरोप लगाया था। मामले में दुर्गा यादव समेत गोविंद लाल, जितेंद्र कुमार, सुरेंद्र गौतम, ऊषा देवी और श्रवण कुमार के खिलाफ विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कराई थी। इसके बाद विवेचना के आधार पर पुलिस ने सभी के खिलाफ ट्रायल कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया है। आरोप पत्र की वैधता को याची दुर्गा यादव ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
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सुनवाई के दौरान कोर्ट ने विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन अधिनियम की धारा 2 के दी गई परिभाषा का हवाला देते हुए कहा कि धर्म परिवर्तन कानून तहत एफआईआर दर्ज करने का अधिकार केवल पीड़ित को है, पुलिस को नहीं। लेकिन, सूबे में लगातार देखने को मिल रहा है कि पुलिस ऐसे मामलों में लगतार एफआईआर दर्ज कर रही है। अधिनियम का दुरुपयोग हो रहा है।
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खफा, कोर्ट ने याची के खिलाफ ट्रायल कोर्ट में शुरू हुई आपराधिक कार्यवाही पर अगली तारीख तक रोक लगा दी। कोर्ट ने 22 अगस्त तक जवाबी हलफनामा दाखिल करते हुए प्रमुख सचिव गृह को यह बताने को कहा है कि पुलिस किस अधिकार से धर्म परिवर्तन कानून के तहत खुद मुकदमा दर्ज करवा रही है।

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