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फूलपुर में किसका खेल बिगाड़ेंगे हार्दिक
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 30 Dec 2017 01:32 AM IST
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हार्दिक पटेल
- फोटो : self
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फूलपुर लोकसभा उपचुनाव से पहले गुजरात के पाटीदार नेता हार्दिक पटेल की मौजूदगी की सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। 31 दिसंबर को उनका कार्यक्रम गैर राजनीतिक बताया जा रहा है लेकिन सरदारी विचारधारा आयोजन समिति के आयोजन में उनके साथ लोकसभा से इस्तीफा देने वाले भाजपा सांसद रहे नाना भाई पटोले की मौजूदगी पर सभी सियासी दलों की नजर है। हालांकि, अलग-अलग दल हार्दिक की मौजूदगी को अपने तरीके से परिभाषित कर रहे हैं और वह कितना प्रभावी होंगे इसका आकलन राजनीतिक विष्लेशक भी नहीं कर पा रहे। मगर गुजरात की सियासत को जिस तरह से उन्होंने प्रभावित किया, उसका असर यहां भी दिखा तो पटेलों की बहुलता वाले फूलपुर उपचुनाव में भाजपा और अपना दल (एस) गठबंधन के प्रत्याशी की चुनौती बढ़ जाएगी।
लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर समिति का कार्यक्रम किसानों और युवाओं के मुद्दों पर है। समिति के नीरज पटेल का कहना है कि इस आयोजन का राजनीति से कोई लेना देना नहीं है लेकिन उनका सुर सत्ता विरोधी है। इसमें हार्दिक को बड़े नेता के रूप में पेश किया जाएगा। उन्हें खून से तौला भी जाएगा। ऐसे में पहले ही उत्तर प्रदेश में पटेलों को एक मंच पर लाने तथा सत्ता में उनकी भागीदारी बढ़ाने की घोषणा कर चुके हार्दिक की मौजूदगी को सीधे तौर पर फूलपुर उपचुनाव तथा 2019 में होने वाले लोकसभा के आम चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है।
फूलपुर के साथ गोरखपुर लोकसभा के लिए भी उपचुनाव होना है लेकिन गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सीट है। ऐसे में विपक्षी दलों की कोशिश फूलपुर में मजबूत दावेदारी पेश करके 2019 के चुनाव के लिए मनोवैज्ञानिक बढ़त लेने की है। चूंकि, फूलपुर में पटेलों की प्रभावी संख्या है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ईवीएम के मुद्दे पर विपक्षी एकता की पहल कर चुके हैं। इस साझा मंच पर भाजपा विरोधी हर खेमे को लाने की कोशिश है। ऐसे में सपा तथा अन्य विपक्षी दल हार्दिक को अवसर के रूप में भी देख रहे हैं।
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सपा के जिलाध्यक्ष कृष्णमूर्ति का कहना है कि हार्दिक का राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है लेकिन वह भाजपा की कलई खोलेंगे। भाजपा के गुजरात मॉडल की सच्चाई भी सबके सामने लाएंगे। भाजपा के खिलाफ विपक्षी एकता की कोशिश के साथ हार्दिक को भी बुलाया जाएगा। हालांकि, अपना दल (एस) के राष्ट्रीय प्रवक्ता ब्रजेंद्र पटेल का कहना है कि हार्दिक इलाहाबाद में कोई फैक्टर नहीं हैं। प्रयाग में माघ मेला के दौरान बहुत से लोग आते हैं। उनका आना भी बस माघ मेला देखने तक ही सीमित रहने वाला है। प्रयाग के लोग जानते हैं कि उनके लिए कौन संघर्ष कर रहा है।
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लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर समिति का कार्यक्रम किसानों और युवाओं के मुद्दों पर है। समिति के नीरज पटेल का कहना है कि इस आयोजन का राजनीति से कोई लेना देना नहीं है लेकिन उनका सुर सत्ता विरोधी है। इसमें हार्दिक को बड़े नेता के रूप में पेश किया जाएगा। उन्हें खून से तौला भी जाएगा। ऐसे में पहले ही उत्तर प्रदेश में पटेलों को एक मंच पर लाने तथा सत्ता में उनकी भागीदारी बढ़ाने की घोषणा कर चुके हार्दिक की मौजूदगी को सीधे तौर पर फूलपुर उपचुनाव तथा 2019 में होने वाले लोकसभा के आम चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है।
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फूलपुर के साथ गोरखपुर लोकसभा के लिए भी उपचुनाव होना है लेकिन गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सीट है। ऐसे में विपक्षी दलों की कोशिश फूलपुर में मजबूत दावेदारी पेश करके 2019 के चुनाव के लिए मनोवैज्ञानिक बढ़त लेने की है। चूंकि, फूलपुर में पटेलों की प्रभावी संख्या है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ईवीएम के मुद्दे पर विपक्षी एकता की पहल कर चुके हैं। इस साझा मंच पर भाजपा विरोधी हर खेमे को लाने की कोशिश है। ऐसे में सपा तथा अन्य विपक्षी दल हार्दिक को अवसर के रूप में भी देख रहे हैं।
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सपा के जिलाध्यक्ष कृष्णमूर्ति का कहना है कि हार्दिक का राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है लेकिन वह भाजपा की कलई खोलेंगे। भाजपा के गुजरात मॉडल की सच्चाई भी सबके सामने लाएंगे। भाजपा के खिलाफ विपक्षी एकता की कोशिश के साथ हार्दिक को भी बुलाया जाएगा। हालांकि, अपना दल (एस) के राष्ट्रीय प्रवक्ता ब्रजेंद्र पटेल का कहना है कि हार्दिक इलाहाबाद में कोई फैक्टर नहीं हैं। प्रयाग में माघ मेला के दौरान बहुत से लोग आते हैं। उनका आना भी बस माघ मेला देखने तक ही सीमित रहने वाला है। प्रयाग के लोग जानते हैं कि उनके लिए कौन संघर्ष कर रहा है।