ज्ञानवापी केस : श्रृंगार गौरी की नियमित पूजा-अर्चना की आपत्ति खारिज होने पर मुस्लिम पक्ष पहुंचा हाईकोर्ट
दिल्ली की राखी सिंह तथा कई अन्य महिलाओं ने जिला जज वाराणसी की कोर्ट में वाद दायर कर ज्ञानवापी परिसर के बाहरी हिस्से में स्थित शृंगार गौरी की नियमित पूजा अर्चना किए जाने की मांग की है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर में शृंगार गौरी की नियमित पूजा अर्चना की अनुमति देने की मांग को लेकर जिला जज वाराणसी की कोर्ट में हिंदू महिलाओं के मुकदमे के खिलाफ मुस्लिम पक्ष की अर्जी खारिज करने के जिला जज के आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। मस्जिद की इंतजामिया कमेटी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर जिला जज की ओर से पारित 12 सितंबर 2022 के आदेश को चुनौती दी है। मुस्लिम पक्ष की ओर से दाखिल याचिका पर अगले सप्ताह हाईकोर्ट में सुनवाई की उम्मीद है।
दिल्ली की राखी सिंह तथा कई अन्य महिलाओं ने जिला जज वाराणसी की कोर्ट में वाद दायर कर ज्ञानवापी परिसर के बाहरी हिस्से में स्थित शृंगार गौरी की नियमित पूजा अर्चना किए जाने की मांग की है। मुस्लिम पक्ष की ओर से ज्ञानवापी मस्जिद की अंजुमन ए इंतजामिया कमेटी ने हिंदू महिलाओं के वाद पर आपत्ति दर्ज कराई थी।
कहा था, यह वाद सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 7 नियम 11 के तहत सुनवाई योग्य नहीं है। इसे खारिज किया जाना चाहिए। जिला जज ने मुस्लिम पक्ष की ओर से उठाई गई आपत्ति खारिज कर दी थी। जिला जज के 12 सितंबर 2022 को दिए इस फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। 18 अक्तूबर को इस केस की हाईकोर्ट में सुनवाई होने की उम्मीद है।
पांच महिलाओं ने वाराणसी की जिला अदालत में बीते वर्ष वाद दाखिल कर शृंगार गौरी की पूजा-अर्चना किए जाने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इस मामले की सुनवाई वाराणसी के जिला जज की कोर्ट में चल रही है। मुस्लिम पक्ष की आपत्ति पर महीनों चली सुनवाई के बाद जिला जज की कोर्ट ने अगस्त में अपना निर्णय सुरक्षित कर लिया था।
जिला जज एके विश्वेश की कोर्ट ने 12 सितंबर को फैसला सुनाते हुए मुस्लिम पक्ष की आपत्ति को खारिज करते हुए राखी सिंह केस को जारी रखने की इजाजत दी थी। हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर मुस्लिम पक्ष ने एक बार फिर दोहराया है कि1991 के ‘प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट’ के तहत इस मामले की सुनवाई नहीं की जा सकती है।
अर्जी में हाईकोर्ट का फैसला आने तक वाराणसी की अदालत में चल रही सुनवाई पर रोक लगाए जाने की भी मांग की गई है। ज्ञानवापी विवाद से जुड़े पांच मामले पहले से ही इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित हैं। हालांकि राखी सिंह का केस पहली बार हाईकोर्ट आया है।