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ज्ञानवापी केस : मुस्लिम पक्षकारों की मांग पर फिर टली ज्ञानवापी मामले की सुनवाई, अब 30 अक्तूबर को होगी बहस

Wed, 04 Oct 2023 06:35 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 04 Oct 2023 06:35 PM IST
सार

वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद परिसर से जुड़ी पांच याचिकाओं पर बुधवार को होने वाली सुनवाई मुस्लिम पक्षकारों की मांग पर 30 अक्तूबर तक टाल दी गई है।

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Gyanvapi case: Hearing in the High Court on the petition challenging the survey of ASI
इलाहाबाद हाईकोर्ट में ज्ञानवापी सर्वे मामले की सुनवाई। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद परिसर से जुड़ी पांच याचिकाओं पर बुधवार को होने वाली सुनवाई मुस्लिम पक्षकारों की मांग पर 30 अक्तूबर तक टाल दी गई है। इन याचिकाओं में तीन याचिकाएं वर्ष 1991 से वाराणसी की अदालत में लंबित सिविल वाद की पोषणीयता और दो याचिकाएं निचली अदालत द्वारा ज्ञानवापी के वैज्ञानिक सर्वेक्षण की अनुमति देने वाले आदेश को चुनौती देने वाली हैं।

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मामले की सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश प्रीतिंकर दिवाकर की एकल पीठ कर रही है। इससे पहले इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की अदालत में पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित कर लिया गया था, जो 28 अगस्त को सुनाया जाना था।
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इसी बीच इस सुनवाई के खिलाफ किसी ने मुख्य न्यायाधीश के समक्ष शिकायती पत्र प्रस्तुत किया था, जिसकी जांच के बाद यह पाया गया कि अदालतों का रोस्टर बदलने के बाद भी न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की अदालत में सुनवाई अनवरत चलती रही। क्षेत्राधिकार के बाहर पूरी हुई सुनवाई के आधार पर मुख्य न्यायाधीश ने मामले को अपनी अदालत में स्थानांतरित करते हुए खुद सुनवाई करने का फैसला लिया था।

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मुस्लिम पक्ष ने केस टालने की मांग की

ऐन मौके पर स्थानांतरित हुई मामले की सुनवाई पर अंजुमन इंतजामिया मसाजिद समेत अन्य मुस्लिम पक्षकारों ने आपत्ति उठाई थी। मुस्लिम पक्ष ने दलील दी थी कि पिछले कई वर्षों में करीब 75 तारीखों पर मामले की सुनवाई हो चुकी है और तीन बार निर्णय सुरक्षित हो चुका है। न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की अदालत द्वारा निर्णय सुनाए जाने की तिथि पर अचानक सुनवाई को अग्रिम सुनवाई के लिए मुख्य न्यायमूर्ति की अदालत में सूचीबद्ध किया जाना अवैधानिक है।

मुस्लिम पक्ष ने उस शिकायती पत्र की प्रति उपलब्ध कराने की मांग भी की थी, जिसके आधार पर मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की अदालत से स्थानांतरित कर मुख्य न्यायाधीश प्रीतिंकर दिवाकर खुद कर रहे हैं। हालांकि, अदालत ने मुस्लिम पक्ष की इस दलील को पहले ही खारिज कर दिया है और मामले में सुनवाई करने का फैसला लिया है।

बुधवार को मामले की सुनवाई नियत थी, लेकिन मुस्लिम पक्षकारों की तरफ से मामले से जुड़े कई दस्तावेजों के निरीक्षण का हवाला देते हुए सुनवाई को टालने की मांग की गई। इस पर अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 30 अक्तूबर को करने का फैसला लिया है।

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