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इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अतिथि प्रवक्ताओं को सात माह से नहीं मिला मानदेय

Wed, 14 Jul 2021 01:33 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 14 Jul 2021 01:33 AM IST
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Guest spokespersons did not get honorarium for seven months
प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) एवं संघटक महाविद्यालयों में पाठ्यक्रम समय से पूरा कराने के लिए जनवरी में नियुक्त किए गए अतिथि प्रवक्ताओं को सात माह से मानदेय नहीं मिला। अब इविवि प्रशासन ने अतिथि प्रवक्ताओं के वेतन भुगतान के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से ग्रांट मांगी है। इस बीच इविवि प्रशासन अतिथि प्रवक्ताओं को अगले सत्र में सेवा विस्तार देने की तैयारी भी कर रहा है।
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इविवि में नियमित शिक्षकों की संख्या स्वीकृत पदों के मुकाबले आधे से भी कम है। कोविड के कारण पिछड़े सत्र को पटरी पर लाने के लिए इविवि प्रशासन ने जनवरी के महीने में सत्र 2020-21 के लिए 36 विभागों में 215 अतिथि प्रवक्ताओं की भर्ती की थी। इसके साथ ही इलाहाबाद डिग्री कॉलेज और राजर्षि टंडन महिला महाविद्यालय में भी गेस्ट फैकल्टी की नियुक्ति की गई थी, क्योंकि इविवि के संघटक महाविद्यालयों में नियमित शिक्षकों की भर्ती के दौरान केवल यही दो कॉलेज ऐसे थे, जहां शिक्षक भर्ती नहीं हो सकती थी और इन कॉलेजों में बड़ी संख्या में नियमित शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। इविवि समेत इलाहाबाद डिग्री कॉलेज और राजर्षि टंडन महिला महाविद्यालयों में अतिथि प्रवक्ताओं की भर्ती तो कर दी गई, लेकिन उन्हें अब तक मानदेय का भुगतान नहीं किया जा सका है।
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इन सबके बीच इविवि प्रशासन सत्र 2021-22 के लिए भी अतिथि प्रवक्ताओं को सेवा विस्तार देने जा रहा है। अतिथि प्रवक्ताओं के मानदेय के भुगतान को लेकर हर साल बाधा आ रही है। सत्र 2019-20 में भी यही समस्या सामने आई थी। उस वक्त इविवि प्रशासन ने यूजीसी ने अनुदान मांगा था और यूजीसी से ग्रांट मिलने के बाद अतिथि प्रवक्क्ताओं को वेतन का भुगतान किया गया था। इस बार भी अतिथि प्रवक्ताओं को भुगतान करने के लिए यूजीसी से तकरीबन 10 करोड़ रुपये की ग्रांट मांगी गई है और यूजीसी को बताया गया कि है नियमित शिक्षकों की संख्या सीमित होने के कारण अतिथि प्रवक्ताओं की भर्ती करनी पड़ी, ताकि कोविड से प्रभावित सत्र को पटरी पर लाया जा सके। इस बारे में इविवि की पीआरओ डॉ. जया कपूर का कहना है कि अतिथि प्रवक्ताओं के मानदेय के लिए यूजीसी की ओर से ग्रांट मिलती है। इसकी डिमांड भेजी जा चुकी है। ग्रांट आते ही मानदेय का भुगतान कर दिया जाएगा।
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