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रिटर्न भरा नहीं, जीएसटी पोर्टल पर हो गया जनरेट
इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 14 Jan 2018 01:12 AM IST
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जीएसटी के तहत समाधान योजना अपनाने वाले शहर के तीन व्यापारियों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। इन व्यापारियों ने जीएसटीआर-4 दाखिल करने के लिए जीएसटी पोर्टल खोला तो पता चला कि रिटर्न पहले से भरा है, जबकि उन्होंने रिटर्न भरा ही नहीं था। जीएसटीआर-4 में दर्ज टर्नओवर टैक्स की देयता देखकर उनका माथा ठनक गया क्योंकि समाधान योजना उन व्यापारियों के लिए है जिनका सालाना टर्नओवर डेढ़ करोड़ रुपये के भीतर है। इन व्यापारियों ने आईडी और पासवर्ड हैक होने की आशंका जताते हुए जीएसटी काउंसिल से लेकर राज्य वस्तु एवं सेवा कर (वाणिज्य कर) कमिश्नर तक से गुहार लगाई लेकिन कोई समाधान अब तक नहीं हो सका है। इसकी वजह से व्यापारी रिटर्न भी नहीं दाखिल कर पा रहे हैं।
मोहम्मद चांद, राजीव कुमार जायसवाल और प्रांशु केसरवानी प्लाईवुड का कारोबार करते हैं। इन व्यापारियों का टर्नओवर सालाना डेढ़ करोड़ से कम है सो उन्होंने सुविधा के लिए समाधान योजना अपना ली। इन व्यापारियों को जुलाई, अगस्त और सितंबर तीन माह का ऑनलाइन रिटर्न 10 दिसंबर तक भरना था। मोहम्मद चांद ने अंतिम तिथि के पहले जीएसटीआर-4 दाखिल करने के लिए आईडी, पासवर्ड के जरिए जीएसटी पोर्टल खोला तो उनके सामने भरा हुआ रिटर्न जनरेट (ऑटो पापुलेटेड) हो गया। रिटर्न में इनवायस वैल्यू 84.46 करोड़ रुपये से अधिक तथा उस पर 18.47 करोड़ रुपये से ज्यादा की देनदारी देखकर मोहम्मद चांद भौंचक रह गए, जबकि उन्होंने इसके पहले रिटर्न दाखिल ही नहीं किया था।
इसी तरह प्रांशु केसरवानी के ऑटो पापुलेटेड रिटर्न में इनवायस वैल्यू 11 करोड़ रुपये से ज्यादा तथा उससे कहीं अधिक 24.6 करोड़ टैक्स की देनदारी दर्शाई गई। कारोबारी राजीव कुमार की भी यही समस्या है। उनके ऑटो पापुलेटेड रिटर्न में इनवायस वैल्यू 64.30 लाख रुपये और करदेयता 14. 6 लाख रुपये दर्शाई गई है।
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प्लाईवुड के ही एक अन्य व्यापारी मजहर अली ने जीएसटीआर-3बी भरने के लिए पोर्टल खोला तो उनके सामने भी ऐसा ही रिटर्न आया, जिसमें करयुक्त वैल्यू 3.72 करोड़ और उस पर करदेयता 25 लाख रुपये से अधिक दर्ज है।
आईडी, पासवर्ड हैक होने की आशंका जताते हुए इन व्यापारियों ने मामले की जांच और समाधान को गुहार लगा रहे हैं। उनकी परेशानी यह है कि जब तक इसका समाधान नहीं होगा, रिटर्न दाखिल नहीं कर सकेंगे और इसमें देरी होने पर जुर्माना भरना होगा। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार कल्याण समिति के संयोजक संतोष पनामा का कहना है कि ऐसी स्थिति में व्यापारी आगे क्या करें, कोई बताने वाला नहीं है, जिस व्यापारी ने समाधान योजना अपना रखी है, उसके रिटर्न में भारी-भरकम खरीद और टैक्स को देनदारी को बोगस मानते हुए तत्काल राहत दी जानी चाहिए।
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मोहम्मद चांद, राजीव कुमार जायसवाल और प्रांशु केसरवानी प्लाईवुड का कारोबार करते हैं। इन व्यापारियों का टर्नओवर सालाना डेढ़ करोड़ से कम है सो उन्होंने सुविधा के लिए समाधान योजना अपना ली। इन व्यापारियों को जुलाई, अगस्त और सितंबर तीन माह का ऑनलाइन रिटर्न 10 दिसंबर तक भरना था। मोहम्मद चांद ने अंतिम तिथि के पहले जीएसटीआर-4 दाखिल करने के लिए आईडी, पासवर्ड के जरिए जीएसटी पोर्टल खोला तो उनके सामने भरा हुआ रिटर्न जनरेट (ऑटो पापुलेटेड) हो गया। रिटर्न में इनवायस वैल्यू 84.46 करोड़ रुपये से अधिक तथा उस पर 18.47 करोड़ रुपये से ज्यादा की देनदारी देखकर मोहम्मद चांद भौंचक रह गए, जबकि उन्होंने इसके पहले रिटर्न दाखिल ही नहीं किया था।
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इसी तरह प्रांशु केसरवानी के ऑटो पापुलेटेड रिटर्न में इनवायस वैल्यू 11 करोड़ रुपये से ज्यादा तथा उससे कहीं अधिक 24.6 करोड़ टैक्स की देनदारी दर्शाई गई। कारोबारी राजीव कुमार की भी यही समस्या है। उनके ऑटो पापुलेटेड रिटर्न में इनवायस वैल्यू 64.30 लाख रुपये और करदेयता 14. 6 लाख रुपये दर्शाई गई है।
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प्लाईवुड के ही एक अन्य व्यापारी मजहर अली ने जीएसटीआर-3बी भरने के लिए पोर्टल खोला तो उनके सामने भी ऐसा ही रिटर्न आया, जिसमें करयुक्त वैल्यू 3.72 करोड़ और उस पर करदेयता 25 लाख रुपये से अधिक दर्ज है।
आईडी, पासवर्ड हैक होने की आशंका जताते हुए इन व्यापारियों ने मामले की जांच और समाधान को गुहार लगा रहे हैं। उनकी परेशानी यह है कि जब तक इसका समाधान नहीं होगा, रिटर्न दाखिल नहीं कर सकेंगे और इसमें देरी होने पर जुर्माना भरना होगा। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार कल्याण समिति के संयोजक संतोष पनामा का कहना है कि ऐसी स्थिति में व्यापारी आगे क्या करें, कोई बताने वाला नहीं है, जिस व्यापारी ने समाधान योजना अपना रखी है, उसके रिटर्न में भारी-भरकम खरीद और टैक्स को देनदारी को बोगस मानते हुए तत्काल राहत दी जानी चाहिए।