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सर्वे : बीस फीट की गहराई में रहस्य खोज सकता है GPR, सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में काम आती है तकनीक

Wed, 26 Jul 2023 09:46 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 26 Jul 2023 09:46 PM IST
सार

जमीन के नीचे मौजूद किसी ऑब्जेक्ट (वस्तु) की उम्र का पता लगाने के लिए जीपीआर तकनीकी से राडार सेंसर का इस्तेमाल किया जाता है। राडार सेंसर ऑब्जेक्ट से टकराने के बाद उसकी आयु की गणना कर लेता है। 

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GPR can find secrets at a depth of twenty feet, technology is useful in preserving cultural heritage
GPR Survey - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ग्रांउट पेनेट्रेटिंग राडार (जीपीआर) तकनीक के इस्तेमाल से 20 फीट की गहराई तक पुरातात्विक साक्ष्यों का आसानी से पता लगाया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार वैसे तो राडार सेंसर का उपयोग आमतौर पर भूगर्भ जल भूजल के संदर्भ में किया जाता है, लेकिन पुरातत्व और रक्षा क्षेत्रों में भी इसका प्रभावी इस्तेमाल होता है।

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जमीन के नीचे मौजूद किसी ऑब्जेक्ट (वस्तु) की उम्र का पता लगाने के लिए जीपीआर तकनीकी से राडार सेंसर का इस्तेमाल किया जाता है। राडार सेंसर ऑब्जेक्ट से टकराने के बाद उसकी आयु की गणना कर लेता है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के भू एवं ग्रहीय विज्ञान विभाग के प्रो. जयंत कुमार पति बताते हैं कि जीपीआर का इस्तेमाल भारत में लंबे समय से हो रहा है और यह काफी प्रभावी है।
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जब कोहरे या बादलों के कारण सेटेलाइट की पहुंच ढीली पड़ जाती है, तब जीपीआर तकनीक काम आती है। इसका राडार सेंसर 20 फीट की गहराई तक किस भी ऑब्जेक्ट को पेनिस्ट्रेट करके आसानी से चिह्नित कर सकता है। इसका उपयोग पुरातात्विक अध्ययन में किया जाता है। यह तकनीक सांस्कृतिक विरासत स्थलों को संरक्षित करने और मूल्यवान कलाकृतियों के नुकसान को कम करने में मदद करती है।

जीपीआर जमीन के नीचे छिपी कलाकृतियों और वस्तुओं का पता लगा सकता है। जीपीआर पुरातत्वविदों को किसी स्थल की उपसतह स्ट्रैटिग्राफी का विश्लेषण करने में मदद करता है। यह तलछट और मिट्टी की विभिन्न परतों के बीच के अंतर का विश्लेषण करता है, जिससे संबंधित के इतिहास, कब्जे की अवधि और संभावित गड़बड़ी की घटनाओं के बारे में जानकारी मिलती है।

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