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शासन ने दो बैच के रेमडेसिविर इंजेक्शन के इस्तेमाल पर लगाई रोक 

Mon, 10 May 2021 12:19 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 10 May 2021 12:19 AM IST
सार

  • कुछ जिलों में कोविड मरीजों की बिगड़ी हालत, डीजीएमई, एमएससीएल का आदेश
  • रेमडसिविर के बैच वी 100166 और वी 100156 के इंजेक्शन परीक्षण तक नहीं लगेंगे

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Government bans the use of two-batch Remedisivir injection
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : Social media

विस्तार

शासन ने प्रदेश के सभी जिलों के सरकारी अस्पतालों  में वी 100166 और वी 100156 बैच के रेमडेसिविर इंजेक्शन के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है।  कुछ जिलों में इस बैच के रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाने के बाद मरीजों की हालत बिगड़ने की शिकायतें मिली थीं। शिकायतों का संज्ञान लेते हुए डीजीएमई और एमएससीएल ने निर्देश दिए हैं कि परीक्षण होने तक अस्पतालों में भर्ती कोरोना संक्रमितों को इस बैच के इंजेक्शन न लगाए जाएं। इस संबंध में सभी जिलों के एडी हेल्थ, सीएमओ और मेडिकल कॉलेज के प्राचार्यों को अर्जेंट मैसेज भेजे गए हैं। 

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Remdesivir injections - फोटो : सोशल मीडिया

कोरोना संक्रमित गंभीर मरीजों के उपचार में उपयोगी माने जा रहे रेमडेसिविर इंजेक्शन की किल्लत के बाद शासन ने सभी जिलों में कई चरणों में इनकी आपूर्ति कराई थी। सरकारी अस्पतालों में रेमडेसिविर इंजेक्शन की उपलब्धता के बाद कालाबाजारी पर रोक और तीमारदारों का भटकाव भी कम हुआ। अब इंजेक्शन के प्रतिकूल पभाव के बाद दो बैच के इंजेक्शनों के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है। 

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रेमडेसिवीर - फोटो : Hetero website
इस संबंध में अतिरिक्त निदेशक चिकित्सा शिक्षा और अतिरिक्त अपर मुख्य सचिव स्तर से अलग-अलग आदेश जारी किए गए हैं। सीएमओ डॉ. प्रभाकर राय ने बताया कि अभी आदेश नहीं देखा। रेलवे और बेली अस्पताल में रेमडेसिविर इंजेक्शन का बैच नंबर चेक कराएंगे। वहीं मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह के मुताबिक कॉलेज के एसआरएन अस्पताल में किसी मरीज या तीमारदार की रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाने से हालत नहीं बिगड़ी है। इस संबंध में इंजेक्शन के बैच नंबर जांचने के बाद ही इंजेक्शन इस्तेमाल के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि हो सकता है कि प्रतिबंधित बैच के इंजेक्शन की आपूर्ति यहां न हुई हो। सोमवार को स्टाक और बैच नंबर की जांच के बाद ही इंजेक्शन इस्तेमाल में लाए जाएंगे।
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