फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Gorakhpur riots case: Government lawyers give anti-riot laws in court

गोरखपुर दंगे का मामला: सरकार के वकीलों ने कोर्ट में दी विरोधी दलीलें

Tue, 01 Aug 2017 02:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Tue, 01 Aug 2017 02:03 AM IST
विज्ञापन
Gorakhpur riots case: Government lawyers give anti-riot laws in court
योगी आदित्यनाथ - फोटो : Getty
गोरखपुर में हुए 2007 के सांप्रदायिक दंगों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी मुकदमा चलाने की मांग में दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान सोमवार को प्रदेश सरकार के वकीलों ने ही परस्पर विरोधी दलीलें दे डालीं। इस स्थिति से मामले की सुनवाई कर रही खंडपीठ भी अचंभित थी। अदालत कुछ देर के लिए इस दुविधा में आ गई कि किसकी बहस स्वीकार करें। बाद में सरकार की ओर से अभियोजन स्वीकृति से इंकार करने के खिलाफ दाखिल अर्जी का विरोध करने का निर्णय वापस ले लिया गया। कोर्ट ने संशोधन अर्जी स्वीकार कर ली है। इस मामले पर अब अगली सुनवाई नौ अगस्त को होगी।
विज्ञापन


परवेज परवाज और अन्य की याचिका पर न्यायमूर्ति कृष्णमुरारी और न्यायमूर्ति एसी शर्मा की पीठ सुनवाई कर रही है। इससे पूर्व कोर्ट ने प्रदेश सरकार से पूछा था कि क्या योगी आदित्यनाथ के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति देने से इंकार करने के बाद निचली अदालत को इस पर सुनवाई का अधिकार है। इस स्थिति में याची के पास क्या विकल्प मौजूद है। सोमवार को इस पर पक्ष रखते हुए अपर महाधिवक्ता ने कहा कि अभियोजन स्वीकृति से इंकार करने के खिलाफ अधीनस्थ न्यायालय को सुनवाई करने का अधिकार है, इसी बीच महाधिवक्ता ने बहस में हस्तक्षेप करते हुए कहा कि अभियोजन स्वीकृति से इंकार कर देने के खिलाफ निचली अदालत को सुनवाई का अधिकार नहीं है। पीठ भी कुछ देर के लिए इस दुविधा में थी किसकी बहस स्वीकार करें।
विज्ञापन

इसके बाद प्रदेश सरकार ने याची की संशोधन अर्जी का विरोध नहीं करने का निर्णय लिया। कोर्ट ने अर्जी स्वीकार करते हुए सरकार को इस पर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। याची को भी निर्देश दिया है कि याचिका में आवश्यक संशोधन कराकर दाखिल करें। गृह सचिव ने चार मई 2017 को योगी के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति देने से इंकार कर दिया था। इसे चुनौती देते हुए अर्जी में मांग की गई है याची को इस बाबत अपनी याचिका में आवश्यक संशोधन की अनुमति दी जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन


इससे पूर्व प्रदेश सरकार ने अर्जी और याचिका की पोषणीयता पर आपत्ति की। कहा गया कि जब सरकार ने अभियोजन स्वीकृति नहीं दी है तो याची संबंधित मजिस्ट्रेट के कोर्ट में अर्जी देकर इसे चुनौती दे सकता है। हाईकोर्ट में इस पर याचिका दाखिल करने का औचित्य नहीं है। इस पर सवाल उठा कि क्या अभियोजन स्वीकृति के मामले में मजिस्ट्रेट को सुनवाई का अधिकार है। सोमवार को प्रदेश सरकार की ओर से विरोधाभासी दलीलें आने के बाद कोर्ट ने संशोधन अर्जी स्वीकार करते हुए इस पर आगे सुनवाई करने का निर्णय लिया है। कोर्ट ने सरकार से इस पर जवाब मांगा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed