थरवई हत्याकांड के बाद एक बार फिर सामूहिक हत्याकांडों को लेकर जिले का गंगापार इलाका चर्चा में है। पूर्व में हुई घटनाओं को देखें तो पता चलता है कि लगातार पिछले पांच सालों से यह इलाका सामूहिक हत्याकांडों से दहलता रहा है। चंद महीनों के अंतराल में यहां एक ऐसी वारदात जरूर सामने आ रही है जिसमें पूरा परिवार ही मौत के घाट उतार दिया जा रहा। पांच महीने पहले ही एक ऐसी ही वारदात फाफामऊ के गोहरी में हुई थी, जिसमें एक परिवार के चार लोगों को बेरहमी से कत्ल कर दिया गया था। इस मामले का अब तक पुलिस खुलासा नहीं कर पाई है। लगातार वारदातों से पुलिस भी सवालों के घेरे में है।
प्रयागराज : सामूहिक हत्याओं से दहल रहा गंगापार, पांच साल में 12वां सामूहिक नरसंहार
अब तक की जांच में थरवई हत्याकांड के पीछे भी पूर्व में हुई वारदातों की तरह एक ही गिरोह का हाथ होने से इंकार नहीं किया जा सकता। पूर्व में हुए सामूहिक हत्याकांडों और इस वारदात के बीच कई समानताएं हैं और यही वजह जिले में किसी सीरियल किलर गिरोह के सक्रिय होने की थ्योरी को और भी मजबूत करती है।
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पहले भी थरवई में हो चुकी है वारदात
थरवई में हुई वारदात से पहले भी जिला सामूहिक हत्याकांडों से दहलता रहा है। पिछले पांच सालों से लगातार नियमित अंतराल पर एक साथ कई-कई लोगों की हत्याओं की वारदातें होती रही हैं। इन सभी वारदातों में कई समानताएं भी रहीं। मसलन इन वारदातों में ऐसे घरों को निशाना बनाया गया जहां रहने वालों की माली हालत बहुत अच्छी नहीं थी। सभी वारदातें देर रात को अंजाम दी गईं यानी वारदात के लिए वह वक्त चुना गया जब लोग गहरी नींद में हों।
एक समानता यह भी रही कि ज्यादतर मकान सड़क के किनारे पर स्थित रहे। यही नहीं ज्यादातर वारदातों में मृतक महिलाओं, युवतियों या किशोरियों के कपड़े अस्त-व्यस्त मिले। एक खास बात यह भी रही कि सभी वारदातों में हत्या के लिए घरेलू औजारों का इस्तेमाल किया गया। यह सभी समानताएं थरवई में हुई वारदात में भी रहीं। मसलन परिवार की माली हालत अच्छी नहीं थी।
कोई गिरोह साजिश के तरह दे रहा अंजाम
जानकारों का कहना है कि सभी वारदातों में इनती समानताएं महज संयोग नहीं हो सकती। कोई न कोई ऐसा गिरोह जरूर है जो इन सभी वारदातों में शामिल है। पुलिस अफसरों का कहना है कि सभी बिंदुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है। एसएसपी अजय कुमार का कहना है कि पूर्व में हुई सामूहिक हत्याकांड की सभी घटनाओं की रिपोर्ट निकलवाई जाएगी। इसका विस्तृत रूप से और पुरी गहराई से अध्ययन किया जाएगा।
सही खुलासे तो क्यों नहीं रुक रही वारदातें
थरवई में हुई वारदात के बाद जिला पुलिस की ओर से पूर्व में किए गए खुलासे भी सवालों के घेरे में हैं। दरअसल पिछले साल नवबंर में गोहरी हत्याकांड के 10 दिन पहले ही पुलिस ने घुमंतू गिरोह के सात सदस्यों को गिरफ्तार करते हुए पांच जघन्य सामूहिक हत्याकांडों का खुलासा किया था।
इनमें सोरांव के यूसुफपुर में एक ही परिवार के पांच लोगों की हत्या के साथ ही मांडा, नवाबगंज दोहरा हत्याकांड भी शामिल था। पुलिस का दावा था कि पकड़े गए छेमार गैंग ने ही इन सभी हत्याकांडों को अंजाम दिया। इससे पहले 2020 में भी छेमार गैंग के सदस्यों को गिरफ्तार करते हुए पुलिस ने होलागढ़ में एक ही परिवार केचार लोगों की हत्या के खुलासे का उावा किया था। बड़ा सवाल यह है कि अगर खुलासे सही थे तो फिर वारदातों का सिलसिला क्यों नहीं थमा।
वारदात दर वारदात
नवंबर 2021- फाफामऊ के गोहरी में एक परिवार के चार लोगों की हत्या
सितंबर 2021- नवाबगंज के जगदीशपुर माली गांव में मां-बेटी की हत्या
जुलाई 2020- होलागढ़ के बरई हरख गांव के शुकुलपुर मजरा निवासी विमलेश पांडेय, दो बेटियों व एक बेटे की निर्ममता से हत्या।
जुलाई 2020- सोरांव के चांदपुर मनी का पूरा में पति-पत्नी की हत्या
मई 2020- मांडा के आंधी गांव में पति-पत्नी व उनकी 16 वर्षीय बेटी की हत्या
जनवरी 2020- सोरांव यूसुफपुर में एक ही परिवार केपांच लोगों की हत्या
2019- थरवई के सरायचंडी में दंपति हत्याकांड
सितंबर 2018- सोरांव के बिगहियां गांव में कमलेश देवी, उसकी बेटी-दामाद व नाती विराट की बेरहमी से हत्या।
मार्च 2018- नवाबगंज के शहावपुर उर्फ पसियापुर गांव में सुशीला देवी व उसके दो बेटे सुनील व अनिल की नृशंस हत्या।
अप्रैल 2017-नवाबगंज के शहावपुर गांव में मक्खन गुप्ता, उनकी पत्नी मीरा देवी, बेटी वंदना व निशा की हत्या।
मार्च 2017- थरवई के पड़िला महादेव मंदिर पर राजस्थान से आए एक दंपती और उसकी बेटी को जलाकर मार डाला गया।