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अराजकता के खिलाफ शुरू लड़ाई बढ़ेगी आगे : रिचा
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 01 Oct 2015 02:16 AM IST
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इलाहाबाद। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में ऐतिहासिक जीत हासिल करने वाली रिचा सिंह का मुख्य हमला परिसर में व्याप्त अराजकता के खिलाफ होगा। जीत से उत्साहित रिचा का कहना था कि उन्होंने अराजकता के खिलाफ तथा परिसर में स्वस्थ्य माहौल के लिए लड़ाई शुरू की है। अब इस लड़ाई को और मजबूती मिलेगी।
विश्वविद्यालय में उपाध्यक्ष, सांस्कृतिक सचिव और संयुक्त मंत्री पद पर छात्राएं विजयी होती रहीं हैं लेकिन अध्यक्ष और महामंत्री पद पर छात्राएं चुनाव लड़ने से भी परहेज करती रहीं। रिचा से पहले 2013 में रोशनी यादव ने चुनाव लड़ा था। समाजवादी छात्रसभा के पैनल से मैदान में आईं रोशनी से पहले अध्यक्ष पद पर 1927 में एसके नेहरू ने चुनाव लड़ा था। एसके नेहरू विजयी हुईं थी लेकिन रोशनी यह उपलब्धि हासिल नहीं कर पाईं। इनके बाद अब रिचा ने ऐतिहासिक जीत हासिल की। महामंत्री पद पर पिछली शदी के सत्तर के दशक में एक छात्रा ने चुनाव लड़ा था लेकिन जीत नहीं मिली थी। इससे ईतर कालेजों की बात करें तो पिछले साल सीएमपी छात्रसंघ चुनाव में पूजा मिश्रा ने ऐतिहासिक जीत हासिल की थी। पूजा से पहले विश्वविद्यालय के संघटक कालेजों में कोई भी छात्रा अध्यक्ष निर्वाचित नहीं हुई।
इस तरह से रिचा की जीत कई मायने में ऐतिहासिक है। रिचा ने जीत के लिए छात्र-छात्राओं के साथ समाजवादी छात्रसभा, सामाजिक न्याय मोर्चा को धन्यवाद बताया। उन्होंने बताया कि कैंपस में पढ़ाई का माहौल स्थापित करना उनकी प्राथमिकता होगी। रिचा मूलत: अलीगढ़ की हैं और यहां ग्लोबलाइजेशन इन मास मीडिया एंड वूमेंस विषय पर रिसर्च कर रही हैं। उनके पिता वीरपाल सिंह पॉवर करपोरेशन में जेई थे जो अब रिटायर हो गए हैं। माता शांति सिंह गृहणी हैं।
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विश्वविद्यालय में उपाध्यक्ष, सांस्कृतिक सचिव और संयुक्त मंत्री पद पर छात्राएं विजयी होती रहीं हैं लेकिन अध्यक्ष और महामंत्री पद पर छात्राएं चुनाव लड़ने से भी परहेज करती रहीं। रिचा से पहले 2013 में रोशनी यादव ने चुनाव लड़ा था। समाजवादी छात्रसभा के पैनल से मैदान में आईं रोशनी से पहले अध्यक्ष पद पर 1927 में एसके नेहरू ने चुनाव लड़ा था। एसके नेहरू विजयी हुईं थी लेकिन रोशनी यह उपलब्धि हासिल नहीं कर पाईं। इनके बाद अब रिचा ने ऐतिहासिक जीत हासिल की। महामंत्री पद पर पिछली शदी के सत्तर के दशक में एक छात्रा ने चुनाव लड़ा था लेकिन जीत नहीं मिली थी। इससे ईतर कालेजों की बात करें तो पिछले साल सीएमपी छात्रसंघ चुनाव में पूजा मिश्रा ने ऐतिहासिक जीत हासिल की थी। पूजा से पहले विश्वविद्यालय के संघटक कालेजों में कोई भी छात्रा अध्यक्ष निर्वाचित नहीं हुई।
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इस तरह से रिचा की जीत कई मायने में ऐतिहासिक है। रिचा ने जीत के लिए छात्र-छात्राओं के साथ समाजवादी छात्रसभा, सामाजिक न्याय मोर्चा को धन्यवाद बताया। उन्होंने बताया कि कैंपस में पढ़ाई का माहौल स्थापित करना उनकी प्राथमिकता होगी। रिचा मूलत: अलीगढ़ की हैं और यहां ग्लोबलाइजेशन इन मास मीडिया एंड वूमेंस विषय पर रिसर्च कर रही हैं। उनके पिता वीरपाल सिंह पॉवर करपोरेशन में जेई थे जो अब रिटायर हो गए हैं। माता शांति सिंह गृहणी हैं।
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