हरिद्वार कुंभ से पहले फर्जी अखाड़ों की सूची पर मचा घमासान
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सोसाइटी रजिस्ट्रार से ऐसे फर्जी अखाड़ों का पंजीयन निरस्त करने और हरिद्वार कुंभ में किसी तरह की भूमि सुविधा न दिए जाने संबंधी प्रस्ताव को लेकर शनिवार को विवाद खड़ा हो गया। अखाड़ा परिषद की बैठक में लिए गए इस निर्णय के बाद दो वर्ष पहले प्रयागराज कुंभ में किन्नर अखाड़े को मान्यता दिए जाने का औचित्य पर सवाल खड़े हो गए हैं।
वर्ष 2019 के प्रयागराज कुंभ में किन्नर अखाड़ा और जूना अखाड़ा के बीच आपसी समझौता हुआ था। उस समझौते के आधार पर किन्नर अखाड़े को 14वें अखाड़े के रूप में मान्यता दी गई थी। इसी आधार पर प्रयागराज कुंभ मेला में किन्नर अखाड़ा ने शाही स्नान किया था। कुंभ के पूर्व मान्यता देने पर विवाद भी उठा था, लेकिन बाद में सब कुछ सामान्य हो गया था और शाही स्नान की अनुमति किन्नरों को मिल गई थी। लेकिन नए विवाद से किन्नर अखाड़ा और अखाड़ा परिषद के बीच दरार आ गई हैं। इससे किन्नर अखाड़े के संन्यासियों में आक्रोश व्याप्त हो गया है।
किन्नर अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष को रचनात्मक कार्यों में अपनी ऊर्जा लगने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि हरिद्वार कुंभ से पहले इस तरह का विवाद खड़ा करने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि हरिद्वार कुंभ में उत्तराखंड सरकार किन्नर अखाड़ा को भूमि सुविधाएं हर हाल में देगी और वहां शिविर जरूर लगाया जाएगा।
उधर, परी अखाड़े की आद्या पीठाधीश्वर स्वयंभू शंकराचार्य त्रिकाल भवंता ने भी अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि को चेतावनी दी। परी पीठाधीश्वर ने बताया कि परी अखाड़ा वैधानिक रूप से गठित और पंजीकृत संस्था है। इसे फर्जी बताना हास्यास्पद है। उन्होंने कहा कि कुंभ, अर्धकुंभ और महाकुंभ हिंदू संस्कृति के स्नान पर्व हैं और इसमें धार्मिक व सांस्कृतिक संगठनों की भागीदारी होती है। हरिद्वार कुंभ में परी अखाड़े को बसने से नहीं रोका जा सकता।
- प्रयागराज के कुंभ में किन्नरों का जूना अखाड़े में विलय हुआ था। इस पर मुझे कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन इससे किन्नर अखाड़े को मान्यता नहीं मिल जाती। देश में तेरह अखाड़ों के अलावा किसी 14वें अखाड़े को मान्यता नहीं दी गई है। परी अखाड़ा, किन्नर अखाड़ा और विश्व आध्यात्म अखाड़ा सब फर्जी हैं। इनको भूमि सुविधाएं न देने का प्रस्ताव परित किया गया है। -महंत नरेंद्र गिरि महाराज, अध्यक्ष अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद
आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी ने अखाड़ा परिषद के खिलाफ खोला मोर्चा
किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने अखाड़ा परिषद के द्वारा 13 अखाड़ों के अलावा अन्य अखाड़ों को फर्जी बताने पर नाराजगी जाहिर की है। कहा कि संविधान में किन्नरों को सबसे बराबरी का दर्जा दिया गया है और किसी तरह का भेदभाव नहीं किया गया है, बावजूद इसके अखाड़ा परिषद बारंबार किन्नरों अपमानित करने का कार्य कर रहा है।
अखाड़ा परिषद किन्नरों को हेय दृष्टि से देखता है और उन्हें समाज की मुख्य धारा में आने पर रोड़ा अटका रहा है। कहा कि किन्नरों से सम्मान की लड़ाई वह जारी रखेंगी। 2019 के प्रयागराज के कुंभ में भी इसी तरह का कुत्सित प्रयास किया गया था जो जूना अखाड़े के हस्तक्षेप के बाद समाप्त हुआ था।
गणतंत्र और संविधान की रक्षा करना सबकी जिम्मेदारी है। सबसे पुराना किन्नर समाज है। 2013 और 2019 के कुंभ में सरकार ने मान्यता देते हुए भूमि सुविधा दी थी। 2021 के हरिद्वार कुंभ में भी रावत सरकार किन्नर अखाड़े को सारी सुविधाएं देगी जो अन्य अखाड़ों को दी जाती हैं।