स्टाइलिश पर आम जन से दूर हुई खादी
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इलाहाबाद। खादी को जन-जन तक पहुंचाने के लिए सरकार जोर-शोर से प्रचार कर रही है मगर हकीकत यह है कि आम जन में पहचान बनाने वाली खादी स्टाइलिश होने के साथ आम लोगों से दूर होती जा रही है। खादी के कपड़े पहनना अब आम आदमी के वश की बात नहीं रही। खादी के रेडीमेड कपड़े हों या ड्रेस मेटेरियल, इनकी कीमतेें इंटरनेशनल ब्रांड के कपड़ों के बराबर या उससे भी ऊपर पहुंच गई हैं। खादी के कपड़ों की कीमतें इतनी अधिक हैं कि उन्हें पहनना अब स्टेटस सिंबल हो गया है।
परेड ग्राउंड में मंगलवार से शुरू हुई राष्ट्रीय खादी एवं ग्रामोद्योग प्रदर्शनी में खादी की सभी वैरायटी आपको मिल जाएगी मगर इसकी कीमतें आम आदमी के लिहाज से काफी अधिक हैं। वैरायटी के हिसाब से खादी 500 से 1800 रुपये प्रति मीटर की रेंज तक है। हालांकि मेले में खादी के रेडीमेड कपड़ों एवं मेटेरियल की खरीद 20 फीसदी तक की छूट भी दी जा रही है। इसके बावजूद मूल्य इतने अधिक हैं कि जेब ढीली करनी ही होगी। दुकानदारों का कहना है कि हाथ का काम होने पर वस्त्र की लागत ज्यादा होती।
खादी के ख्वाहिशमंदों को इसकी अलग-अलग वैरायटी के लिए भटकने की जरूरत नहीं है। उत्तर प्रदेश खादी ग्रामद्योग बोर्ड ने इसकी ऑनलाइन मार्केटिंग शुरू कर दी है। कैबिनेट मंत्री खादी एवं ग्रामोद्योग ब्रह्मशंकर त्रिपाठी और खादी एवं ग्रामोद्योग की प्रमुुख सचिव मोनिका एस. गर्ग ने प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए बताया कि खादी के उत्पादों को दुनिया के कोने-कोने में पहुंचाने के लिए आनलाइन मार्केटिंग भी शुरू कर दी गई है। इसी क्रम में बोर्ड ने स्नैपडील और फ्लिपकार्ड से खादी वस्त्रों की आनलाइन ट्रेडिंग के लिए समझौता किया गया है।
प्रदर्शनी में खादी की शर्ट, मोदी जैकेट, कुर्ते, सदरी के साथ ही साड़ियों की लंबी रेंज आपको यहां मिल जाएगी। प्रदर्शनी के पहले दिन सबसे अधिक मांग मोदी जैकेट की रही। युवाओं को लुभाने के लिए जहां खादी खादी की शर्ट में एक्वा ग्रीन, सी ब्लू, पीच, नेचर ग्रीन, रायल ब्लू, डीप चॉकलेट, मस्टर्ड, कैलोसिया आरेंज, बेबी पिंक, लेमन येलो, मिस्टिक पर्पल जैसे नये रंगों और अलग-अलग प्रिंट का इस्तेमाल किया गया है तो वहीं साड़ियों में खादी सिल्क के साथ दूसरे फैब्रिक्स का इस्तेमाल भी बखूबी किया गया है। कॉटन और पॉली खादी के साथ ही सिल्क में मटका, कटिया, मूंगा, टसर और कोसा सिल्क यहां उपलब्ध है।
राष्ट्रीय खादी ग्रामोद्योग प्रदर्शनी का मजा बारिश ने फीका कर दिया। बारिश की वजह से दुकानदार न तो कारीगर अपने उत्पादों को सही तरीके से प्रदर्शित कर पाए और न ही ग्राहक ही पहुंचे। प्रदर्शनी में ज्यादातर स्टाल बंद ही रहे। बारिश की वजह से प्रदर्शनी के उद्घाटन के दिन ही बिक्री न होने की वजह से कारगरों के चेहरे मायूस रहे। ग्रामोदय संस्थान सीतापुर के पीसी मिश्रा ने बताया कि पहले दिन तो बिक्री हुई नहीं। उम्मीद यही है कि बारिश न हो, जिससे ग्राहक प्रदर्शनी में आकर खरीदारी कर सके।