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अस्पताल से पोस्टमार्टम हाउस तक कोहराम

Mon, 12 Feb 2018 01:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Mon, 12 Feb 2018 01:25 AM IST
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From Hospital to Post Mortem House Kohram
इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
एलएलबी छात्र दिलीप कुमार सरोज की हत्या के बाद अस्पताल से लेकर पोस्टमार्टम हाउस तक कोहराम मचा रहा। सुबह अस्पताल में इलाज के दौरान मौत की खबर मिलते ही छात्रों का हुजूम सिविल लाइंस स्थित अस्पताल पहुंच गया। इसके बाद परिजनों के साथ बड़ी संख्या में छात्र भी पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। परिवार के लोग हों या दोस्त, दिलीप की मौत से हर कोई स्तब्ध था। साथी की मौत पर दोस्तों की आंखें नम थीं। दिलीप के दोनों भाई और रिश्तेदार भी सदमे में दिखे।
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सुबह 10 बजे जैसे ही दिलीप की मौत की सूचना मिली, बड़ी संख्या में सलोरी क्षेत्र में रहने वाले छात्र सिविल लाइंस स्थित निजी अस्पताल पहुंच गए। इलाहाबाद डिग्री कॉलेज में दिलीप के साथ पढ़ने वाले छात्र भी पहुंच गए। साथी के साथ हुई बेरहमी पर छात्र आक्रोशित भी दिखे। कुछ छात्रों ने बताया कि बहुत से छात्र प्रदर्शन की तैयारी में थे। हालांकि मौके की नजाकत देख पुलिस अफसरों ने मामला संभाल लिया। करीब 11.30 बजे पुलिस शव लेकर पोस्टमार्टम हाउस के लिए रवाना हुई तो छात्र भी पीछे-पीछे चल दिए। करीब आधे घंटे बाद परिजनों, रिश्तेदारों के साथ ही बड़ी संख्या में छात्र भी पोस्टमार्टम हाउस पर जुट गए थे। मौके पर मौजूद दिलीप के बड़े भाई महेश और रिश्तेदार भी सदमे में थे। बवाल की आशंका को देखते हुए कर्नलगंज के अलावा खुल्दाबाद, कोतवाली थाने की फोर्स भी बुलाई गई।
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दिलीप के ही लॉज में रहने वाले अवनीश मौर्य ने बताया कि  उसके व्यवहार का हर कोई कायल था। 2010 में उसके आने से पहले से ही दिलीप सलोरी स्थित शुक्ला लॉज में रहता था। बकौल अवनीश, इतने सालों में कभी दिलीप का किसी से कोई विवाद नहीं हुआ। दिलीप के पिता बीएसएनएल से रिटायर थे। साथ ही बड़े भाई भी जिला उद्योग केंद्र में सांख्यिकीय अधिकारी हैं। ऐसे में उसे आर्थिक तौर पर किसी तरह की कोई कमी नहीं थी। यही वजह थी कि जरूरत पड़ने पर लॉज में रहने वाले अन्य छात्रों की मदद करने से भी वह पीछे नहीं हटता था। पोस्टमार्टम हाउस पर मौजूद लॉज में ही रहने वाले विनय यादव, सुरेश दुबे, अरविंद, राकेश मौर्य, राजू वर्मा, शुभम सिंह ने भी कुछ इसी तरह की बातें बताईं।
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अवनीश ने बताया कि दिलीप पढ़ाई में भी ठीक था। सरकारी नौकरी पाने के लिए वह लगातार प्रयासरत था। ग्रेजूएशन के बाद आगरा से उसने बीएड किया, फिर इलाहाबाद आकर एडीसी में एलएलबी में दाखिला ले लिया। वह इस समय एलएलबी द्वितीय वर्ष का छात्र था। लॉज में रहने वाले छात्रों की मानें तो आगामी आठ अप्रैल को प्रस्तावित आरओ/एआरओ केलिए भी उसने तैयारी की थी। इन दिनों वह उसी परीक्षा की तैयारी में लगा था।


अवनीश ने बताया कि दिलीप से उसकी आखिरी मुलाकात करीब छह बजे लॉज की सीढ़ियों पर हुई थी। बताया कि दिलीप आरओ/एआरओ परीक्षा की तैयारी कर रहा था। इसी सिलसिले में वह एक प्रश्न को समझने केलिए ऊपर केतल पर रहने वाले सीनियर छात्र महीश तिवारी के पास गया था। वहां से लौटते वक्त ही दोनों की मुलाकात हुई। बकौल अवनीश, पूछने पर उसने बताया था कि कुछ देर बाद वह बाजार जाने वाला है। उधर हमले में दिलीप के साथ घायल हुए उसके दोस्त समीर ने बताया कि ईश्वरशरण डिग्री कॉलेज चौराहे के पास वह प्रकाश और दिलीप से मिला। इसकेबाद तीनों लोग कपड़े खरीदने गए। कपड़े पसंद नहीं आए और तो वे एक अन्य दोस्त सिद्धार्थ को लेकर कालिका रेस्टोरेंट पहुंच गए।
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