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प्लाट दिलाने के नाम 74 लाख ठगने वालों की तलाश में दबिश
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fraud of 74 lakhs rupees, case filed
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प्रयागराज। उतरांव के रहने वाले रिटायर्ड फौजी राजपति यादव को सोरांव में प्लाट दिलाने के नाम पर 74 लाख रुपये ठग लिए गए। जब काफी दिन तक उन्हें प्लाट के कागज नहीं दिए गए तो उन्होंने कई जगह शिकायत की। इसके बाद ठगों ने उन्हें लालच दिया कि वे बेटे की नौकरी हाईकोर्ट में लगवा देंगे। ठगी करने वाला एक शख्स खुद को सरकारी वकील बताता है। पुलिस ने बुधवार को कुछ आरोपियों की तलाश में दबिश दी।
उतरांव के राजपति यादव रिटायर्ड फौजी हैं। रिटायरमेंट के बाद उन्होंने बिजनेस के लिए जमीन देखना शुरू किया। सोरांव का रहने वाला शमीम अहमद उनसे मिला और खुद को सरकारी वकील बताया। उन्हें सोरांव में 800 वर्ग गज प्लाट दिखाया गया। शमीम के गिरोह में तमाम लोग थे। सभी खुद को कुछ न कुछ बताते थे। राजपति उनके प्रभाव में आ गए और उन्होंने 74 लाख रुपये प्लाट के लिए दे दिया। करीब दो साल पहले राजपति ने उन्हें पैसे दिए।
इसके बाद प्लाट के कागज देने में वे लोग आनाकानी करने लगे। रोज एक बहाना बनाते थे। इसके बाद शमीम ने राजपति से कहा कि अगर वह जमीन नहीं दिला पाया तो उनके बेटे की नौकरी हाईकोर्ट में लगवा देगा। बाकी पैसा उसे धीरे धीरे कर वापस कर देगा। राजपति इस पर भी राजी हो गए। काफी समय हो गया तो वह समझ गए के वे ठगों के गिरोह के चक्कर में फंस गए।
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इसके बाद वे महीनों रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए दौड़ते रहे। कुछ दिन पहले वे आईजी केपी सिंह से मिले। उनके निर्देश पर दो दिन पहले उतरांव थाने में शमीम, अहमद, प्रमोद शर्मा, रमेश यादव, अनीस, कैफ, सैफ, शाहिद, पवन और मनोज के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई। इंस्पेक्टर उतरांव ने बताया कि ठगों की तलाश में दबिश दी जा रही है। राजपति यादव से भी जमीन वाले कागजात उपलब्ध कराने को कहा गया है। विवेचक अमर नाथ सिंह ने बताया कि शमीम अहमद ही मुख्य आरोपी है। वह खुद को एजीए बताता है।
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उतरांव के राजपति यादव रिटायर्ड फौजी हैं। रिटायरमेंट के बाद उन्होंने बिजनेस के लिए जमीन देखना शुरू किया। सोरांव का रहने वाला शमीम अहमद उनसे मिला और खुद को सरकारी वकील बताया। उन्हें सोरांव में 800 वर्ग गज प्लाट दिखाया गया। शमीम के गिरोह में तमाम लोग थे। सभी खुद को कुछ न कुछ बताते थे। राजपति उनके प्रभाव में आ गए और उन्होंने 74 लाख रुपये प्लाट के लिए दे दिया। करीब दो साल पहले राजपति ने उन्हें पैसे दिए।
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इसके बाद प्लाट के कागज देने में वे लोग आनाकानी करने लगे। रोज एक बहाना बनाते थे। इसके बाद शमीम ने राजपति से कहा कि अगर वह जमीन नहीं दिला पाया तो उनके बेटे की नौकरी हाईकोर्ट में लगवा देगा। बाकी पैसा उसे धीरे धीरे कर वापस कर देगा। राजपति इस पर भी राजी हो गए। काफी समय हो गया तो वह समझ गए के वे ठगों के गिरोह के चक्कर में फंस गए।
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इसके बाद वे महीनों रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए दौड़ते रहे। कुछ दिन पहले वे आईजी केपी सिंह से मिले। उनके निर्देश पर दो दिन पहले उतरांव थाने में शमीम, अहमद, प्रमोद शर्मा, रमेश यादव, अनीस, कैफ, सैफ, शाहिद, पवन और मनोज के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई। इंस्पेक्टर उतरांव ने बताया कि ठगों की तलाश में दबिश दी जा रही है। राजपति यादव से भी जमीन वाले कागजात उपलब्ध कराने को कहा गया है। विवेचक अमर नाथ सिंह ने बताया कि शमीम अहमद ही मुख्य आरोपी है। वह खुद को एजीए बताता है।